आजमगढ़। अभी पंचायत चुनाव की घोषणा नहीं हुई है। इसके बाद भी चुनावी रंजिश चरम पर पहुंच गई है। बीते दो माह में राजनैतिक हत्याओं की बात की जाए तो अब तक छह से अधिक ऐसी हत्याएं हो चुकी है। सैकड़ों की संख्या में मारपीट आदि की घटनाओं हो चुकी हैं। राजनैतिक हत्याओं पर लगाम लगाने को लेकर पुलिस ने बीट पुलिसिंग को मजबूत करने की कवायद शुरू किया था लेकिन अब तक पुलिस की सारी कवायद हवा-हवाई ही साबित हो रही है। एक के बाद एक राजनैतिक हत्याएं हो रही है और महकमा मूकदर्शक बना हुआ है।
जिले में राजनैतिक हत्याओं का दौर 13 अगस्त से शुरू हुआ। जब पड़ोसी गांव के प्रधान के यहां पार्टी करने गए देवगांव कोतवाली क्षेत्र के नाऊपुर गांव निवासी हीरालाल यादव व उसके पुत्र तेज यादव की प्रधान के पुत्र ने गोली मार कर हत्या कर दी। इस हत्याकांड में महिला प्रधान के साथ ही अन्य आरोपी गिरफ्तार हो चुके है। 14 अगस्त को तरवां थाना क्षेत्र के बांसगांव के प्रधान सत्यमेव जयते उर्फ पप्पू राम की गांव के पास स्थित इंटर कालेज के पास हत्या कर दी गई। प्रधान हत्याकांड में चार लोग नामजद किए गए, जिसमें तीन गिरफ्तार हो चुके है तो वहीं मुख्या आरोपी अभी भी फरार चल रहा है। इसके बाद अगली राजनैतिक हत्या 24 अगस्त को निजामाबाद थाना क्षेत्र में हुई। नेवादा गांव निवासी बीडीसी सुरेंद्र यादव की बदमाशों ने गोली मार कर हत्या कर दी। इस हत्याकांड के भी प्रमुख आरोपी गिरफ्तार हो चुके है। राजनैतिक हत्याओं का क्रम यहीं शांत नहीं हुआ। आठ अक्टूबर को पवई थाना क्षेत्र के जल्दीपुर गांव निवासी भाजपा नेता अर्जुन यादव की बाइक सवार बदमाशों ने गोली मार कर हत्या कर दी। इस हत्याकांड में आरोपी अज्ञात है। वहीं इसी दिन मेंहनगर थाना क्षेत्र में बीडीसी पुत्र की संदिग्धावस्था में मौत हो गई। अभी पंचायत चुनाव की तिथि घोषित नही हुई है और उसके पूर्व ही चुनावी रंजिश में राजनैतिक हत्याओं का दौर जिले में शुरू हो चुका है और पुलिस महकमा सिर्फ बीट पुलिसिंग को मजबूत करने की कवायद शुरू कर मूकदर्शक बनी हुई है। प्रधान हत्याकांड का मुख्य आरोपी अब तक गिरफ्त में नहीं आने से परिजनों व ग्रामीणों में आक्रोश व्याप्त है तो वहीं बीडीसी प्रतिनिधि व भाजपा नेता अर्जुन यादव की हत्या भी पुलिस के लिए चुनौती है।