आजमगढ़। घाट के ठेके को लेकर दो पक्षों में हुए विवाद में मड़ई व नाव जला दिए जाने के 19 साल पुराने मामले में न्यायालय ने दोषियों को सजा सुनाई है।
फास्ट ट्रैक कोर्ट नंबर दो के अपर सत्र न्यायाधीश अमर सिंह ने सोमवार को सुनवाई पूरी होने के बाद छह दोषियों को पांच-पांच वर्ष कारावास व प्रत्येक को 90-90 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है।
जानकारी मुताबिक महाराजगंज थाना क्षेत्र के कुड़ही गांव निवासी वादी गोपाल साहनी 21 जनवरी 2005 की शाम करीब पांच बजे शाहपुर घाट के उत्तरी छोर स्थित अपनी रिहायशी मड़ई में मौजूद थे। उसी समय खीरीजोत गांव निवासी सरवन पांडेय, आराजी खलगा निवासी विजयी, जजमन जोत गांव निवासी जगई उर्फ जगन्नाथ, पन्ने लाल, शंकरपुर निवासी बहादुर खोखर जोत गांव निवासी राजेंद्र वहां एकजुट होकर पहुंचे।
घाट के ठेके को लेकर पुरानी रंजिश में उन्होंने रामपलट साहनी, महेंद्र साहनी और साजन साहनी को बुरी तरह पीटा और मड़ई को आग के हवाले कर दिया। इसके बाद वे नाव पर सवार होकर घाट के दक्षिणी छोर तक पहुंचे और वहां खड़ी नाव को भी आग लगा दी। घटना के बाद गोपाल साहनी ने कुल 11 लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई थी।
पुलिस जांच के बाद छह आरोपियों के विरुद्ध चार्जशीट न्यायालय में दाखिल की गई। अभियोजन पक्ष की ओर से चार गवाहों को न्यायालय में परीक्षित कराया।
दोनों पक्षों की दलीलों और प्रस्तुत साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने सभी छह आरोपियों सरवन, विजय, जगई उर्फ जगन्नाथ, पन्ने लाल, बहादुर प्रसाद और राजेंद्र को दोषी मानते हुए सजा सुनाई।