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रोडवेज पर हुई गुड़िया घर वापसी डाक्यूमेंट्री की हुई शूटिंग

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आजमगढ़। स्वयं सहायता समूह के प्रति लोगों को जागरूक करने और इससे महिलाओं को जोड़ने के लिए डीएम एनपी सिंह के निर्देश पर राष्ट्रीय आजीविका मिशन कार्यालय डाक्यूमेंट्री फिल्म बनाने का निर्णय लिया है। इसके तहत सोमवार को रोडवेज परिसर में ‘‘गुड़िया की घर वापसी’’ की शूटिंग की गई।
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स्वयं सहायता समूह किस प्रकार कार्य करता है, इसके बारे में जानकारी न होने के कारण बहुत सी महिलाएं इससे जुड़ नहीं पाती हैं। इसे देखते हुए स्वयं सहायता से लोगों को जोड़ने के लिए डीएम ने इसकी कार्यशैली पर एक डाक्यूमेंट्री फिल्म बनाने का निर्णय लिया है। इस डाक्यूमेंट्री फिल्म का गांव-गांव प्रदर्शन कर महिलाओं को इससे जोड़ा जाएगा। ताकि महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाया जा सके। इस डाक्यूमेंट्री फिल्म को एआर इंटरटेनमेंट कंपनी के आशीष राय और उनकी टीम द्वारा तैयार किया जा रहा है। यह फिल्म 15 से 20 मिनट की होगी। जिसकी स्क्रिप्ट डीएम एनपी सिंह द्वारा तैयार की गई है। ‘‘गुडिया की घर वापसी’’ एक ऐसी लड़की की कहानी है जिसकी कम उम्र में शादी हो जाती है। मायके में उसे गुड़िया के नाम से सभी लोग बुलाते हैं। लेकिन ससुराल में उसका यह नाम गायब हो जाता है। उसका पति शराब पीने का आदी है। शराब पीने के बाद वह उसे प्रताड़ित करता है। उसकी सास और ससुर भी पति का ही साथ देते हैं। ऐसे में उसे कुछ सुझाई नहीं देता है। उसके मन में उल्टे सीधे ख्याल आने लगते हैं। कभी उसमें मन में आत्महत्या करने की इच्छा होती है तो कभी घर से भागने की। इन्हीं झंडावातों से जूझते हुए वह एक दिन घर छोड़ देती है। वह रोडवेज पहुंचती है और दूसरी जगह जाने के लिए बस का इंतजार करती है। तभी वहां राष्ट्रीय आजीविका मिशन से जुड़ी सीआरपी (समेह गठित करने वाली दीदी) दूसरी बस से उतरती हैं। उनकी निगाह डरी सहमी गुड़िया पर पहुंचती है। वह उसके पास पहुंचती हैं और उसे विश्वास में लेती है। इसके बाद गुड़िया उसे अपनी पूरी व्यथा सुनाती है। तब सीआरपी की महिलाओं द्वारा उसे स्वयं सहायता समूह के बारे में बताया जाता है। उसे विश्वास दिलाने के लिए वह उसे लेकर डीएम के पास पहुंचती हैं। डीएम उसे समूह के बारे में सारी जानकारी देते हैं। वह वापस घर लौट आती है और समूह से जुड़ जाती है। जब उसके समूह का खाता खुलता है तो पहली बार किसी सरकारी अभिलेख में अपना नाम देखकर उसे बहुत खुशी होती है। कुछ दिन बाद जब समूह के खाते में 15000 रुपये की धनराशि आती है तो उसकी खुशी का ठिकाना नहीं रहता है। इसके बाद वह विभिन्न प्रकार के हुनर सिखती है। जिसके बाद उसके खाते में उद्यम शुरू करने के लिए सीआईएफ (सामुदायिक निवेश निधि) एक लाख 10 हजार रुपये की धनराशि आती है। जिससे वह उद्यम की ओर बढ़ती है। इसके बाद उसकी परिवार में इज्जत बढ़ जाती है। अब ससुराल में भी उसे लोग गुड़िया के नाम से पुकारने लगते हैं। इस प्रकार की गुड़िया की घर वापसी होती है।
समूह की 12 महिलाओं पर भी बनेगी डाक्यूमेंट्री
आजमगढ़। स्वयं सहायता समूह से जुड़ने के बाद जनपद में कई महिलाओं की किस्मत बदल गई है। ऐसी 12 महिलाओं के जीवन पर भी डाक्यूमेंट्री तैयार करने की योजना है। जिसमें सीता आजीविका स्वयं सहायता समूह इस्माइलपुर गोरिया की ममता राजभर, मां संतोषी आजीविका स्वयं सहायता समूह उमरीकला की मंजू कश्यप, जय भी आजीविका स्वयं सहायता समूह सुरहन कोठिया की रंजू, राधा आजीविका स्वयं सहायता समूह टेवखर की श्यामलता, जय हनुमान आजीविका स्वयं सहायता समूह खरगीपुर की आरती प्रजापति, सांई आजीविका स्वयं सहायता समूह की तियरी मनिरामपुर की सरोज यादव, सरस्वती आजीविका स्वयं सहायता समूह शंकरपुर की मीरा, संतोषी आजीविका स्वयं सहायता समूह शांतिपुर की पुनीता, लक्ष्मी आजीविका स्वयं सहायता समूह चकिया बालपुर की कुसुम, दुर्गा आजीविका स्वयं सहायता समूह पसिका की नीतू शर्मा, कृष्णा आजीविका स्वयं सहायता समूह ठेकमा की सुधा मौर्या और मां भगवती आजीविका स्वयं सहायता समूह सिसवारा की नीतू मिश्रा शामिल हैं।
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महिलाओं को सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने का सरकार का प्रयास है। लेकिन स्वयं सहायता समूह के बारे में जानकारी न होने के कारण बहुत सी महिलाएं इससे जुड़ नहीं पाती है। महिलाओं को इसके प्रति जागरूक करने और उन्हें स्वयं सहायता समूह से जोड़ने के लिए डीएम की ओर से यह डाक्यूमेंट्री तैयार कराई जा रही है। साथ ही स्वयं सहायता समूह से जुड़ी जो अन्य महिलाएं हैं उनके ऊपर भी डाक्यूमेंट्री बनाने की योजना है। ताकि अन्य महिलाओं को भी प्रेरित किया जा सके।
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बीके मोहन, डीसी एनआरएलएम।
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