इस दौरान भौरों ने उन्हें काटना शुरू कर दिया। तभी एक व्यक्ति ने देखा कि सारे भौरें जमीन से निकल रहे हैं। इसके बाद चरवाहों ने उस स्थान की खुदाई शुरू की तो वहां से शिवलिंग प्रकट हुआ। जिसे यहां स्थापित किया गया। तभी से इस स्थान का नाम भंवरनाथ पड़ गया है।
मान सिंह ने कहा कि हम अंबेडकर नगर जनपद के रहने वाले हैं। हमारी इस मंदिर के प्रति अगाध श्रद्घा है। हम बचपन से ही इस मंदिर में बाबा के दर्शन को आते रहे हैं। कहा जाता है कि बाबा सारे भक्तों की मुराद पूरी करते हैं। वहीं आशीष कुमार मौर्य ने कहा कि बाबा की कृपा से हमारे हर काम आसानी से हो जाते हैं। इसलिए जब भी आजमगढ़ आते हैं बाबा का दर्शन करना नहीं भूलते।
मंदिर के पुजारी अभिनंदन पांडेय ने कहा कि बाबा भंवरनाथ जमीन से निकले हैं। मान्यता है कि सावन महीने में सोमवार को बाबा का जलाभिषेक करने से वह अपने भक्त की सारी मुराद पूरी करते हैं। वैसे तो प्रतिदिन एक हजार से 1200 लोग बाबा के दर्शन पूजन को आते हैं। लेकिन सावन में भक्तों की संख्या दो हजार से ज्यादा तक पहुंच जाती है।