सरयू नदी के जलस्तर में लगातार बढ़ाव जारी है। सोमवार को नदी बदरहुआ नाले पर खतरा बिंदु से 13 सेंटीमीटर और डिघिया नाले पर 79 सेंटीमीटर ऊपर बह रही थी। जलस्तर बढ़ने से तटवर्ती गांवों के ग्रामीणों में एक बार फिर बाढ़ का डर सताने लगा है।
मानिकपुर, सोनोरा और इस्माइलपुर जाने वाले संपर्क मार्ग पर तीन फीट तक पानी भर गया है। सोमवार दोपहर इस्माइलपुर निवासी कक्षा चार के छात्र आनंद और आर्यन रौनापार से पढ़ाई कर घर लौट रहे थे। बच्चों ने बताया कि उन्हें समय से नाव नहीं मिल सकी।
मजबूरी में दोनों तेज बहाव के बीच पानी से होकर घर जाने लगे। पानी बच्चों के सीने तक पहुंच रहा था। ऐसे में कभी भी हादसा हो सकता है। ग्रामीणों ने प्रशासन से नाव संचालन व्यवस्था बेहतर करने की मांग की है।
मानिकपुर, सोनोरा और इस्माइलपुर समेत बाढ़ प्रभावित गांवों के लोगों के आवागमन के लिए प्रशासन की ओर से नावें संचालित की जा रही हैं, लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि कई बार नाव के लिए घंटों इंतजार करना पड़ता है। इससे सबसे अधिक परेशानी स्कूली बच्चों, बुजुर्गों और जरूरी काम से आने-जाने वाले लोगों को होती है।
ग्रामीणों के अनुसार, सरयू नदी का जलस्तर स्थिर होने के बाद कभी घटने लगता है तो कभी दोबारा बढ़ जाता है। पहाड़ी क्षेत्रों में बारिश होने के बाद नेपाल से आने वाला पानी बनबसा और शारदा बैराज के जरिए सरयू नदी में छोड़ा जाता है।
इसका असर सगड़ी क्षेत्र में भी पड़ता है और जलस्तर बढ़ने से बाढ़ व कटान की स्थिति पैदा हो जाती है। महुला-गढ़वल और घाघरा के बीच बसे तटवर्ती गांवों के ग्रामीणों को हर साल बाढ़ और कटान का दंश झेलना पड़ता है।
इस बार भी नदी का जलस्तर बढ़ने से ग्रामीणों की चिंता बढ़ गई है। फिलहाल मानिकपुर, सोनोरा और इस्माइलपुर में आवागमन के लिए नावों का संचालन किया जा रहा है।
इस्माइलपुर बाढ़ चौकी पर डॉक्टर नदारद, डीएमओ ने मांगी रिपोर्ट
लाटघाट। अमर उजाला में प्रकाशित खबर का संज्ञान लेते हुए जिला मलेरिया अधिकारी डॉ. संजय कुमार सिंह सोमवार दोपहर बाद टीम के साथ इस्माइलपुर बाढ़ चौकी पहुंचे। वहां एएनएम सुभाष शुक्ला अकेले मौजूद मिले। चौकी पर तैनात डॉक्टर विवेक शाह के नहीं पहुंचने की ग्रामीणों ने शिकायत की। इस पर डीएमओ ने कहा कि वह मुख्य चिकित्सा अधिकारी को पत्र लिखकर डॉक्टर की अनुपस्थिति से अवगत कराएंगे। साथ ही दूसरे डॉक्टर की तैनाती और अनुपस्थित रहने वाले चिकित्सक के खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति की जाएगी। चौकी पर दवाएं रखी मिलीं, लेकिन एएनएम को गंभीर मरीजों को दवा देने का अधिकार नहीं है। डीएमओ ने बताया कि यहां केवल सर्दी-जुकाम और बुखार की दवा दी जा सकती है। गंभीर मरीजों को सीएचसी या पीएचसी जाना होगा, जो बाढ़ चौकी से करीब आठ से दस किलोमीटर दूर हैं। इससे ग्रामीणों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
बाढ़ पीड़ितों में 3500 पैकेट राहत सामग्री बांटी
लाटघाट। रौनापार स्कूल से बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए प्रशासन की ओर से राहत सामग्री के पैकेट वितरित किए जा रहे हैं। तहसीलदार सगड़ी नवीन निश्चल त्रिपाठी ने बताया कि अब तक करीब 3500 जरूरतमंद लोगों को राहत सामग्री उपलब्ध कराई जा चुकी है। बाकी लोगों को मंगलवार को कैबिनेट मंत्री (कारागार) की मौजूदगी में राहत सामग्री वितरित की जाएगी। उपजिलाधिकारी संजीव कुमार राय ने कहा कि कोई भी बाढ़ प्रभावित ग्रामीण राहत सामग्री से वंचित नहीं रहेगा। सभी बचे लोगों को राहत सामग्री उपलब्ध कराई जाएगी।
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राहत सामग्री लेने पहुंचीं महिलाएं मायूस लौटीं
लाटघाट। देवारा खास राजा की महिलाएं बाढ़ राहत सामग्री लेने पहुंचीं, लेकिन सूची प्रमाणित न होने के कारण उन्हें मायूस होकर लौटना पड़ा। समरजीत के पुरवा की साकेत पटेल, बिंदु, इस्रावती, गीता पटेल और सुलोचन के पुरवा की पूनम राहत सामग्री लेने पहुंची थीं। महिलाओं के अनुसार, किसी प्रधान से सूची प्रमाणित नहीं होने के कारण उन्हें सामग्री नहीं दी गई। लेखपाल रितेश कुमार यादव ने बताया कि जीते हुए या हारे हुए प्रधान द्वारा सूची प्रमाणित किए जाने के बाद ही संबंधित लोगों को बाढ़ राहत सामग्री का लाभ मिल सकेगा। इससे महिलाओं में नाराजगी रही। संवाद
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बदरहुआ में 8 सेंटीमीटर बढ़ा सरयू का जलस्तर
लाटघाट। सरयू का रविवार शाम चार बजे बदरहुआ नाले पर जलस्तर 71.81 मीटर था, जो सोमवार को आठ सेंटीमीटर बढ़कर 71.89 मीटर हो गया। वहीं डिघिया नाले पर रविवार को 71.14 मीटर दर्ज जलस्तर सोमवार को पांच सेंटीमीटर बढ़कर 71.19 मीटर पहुंच गया। डिघिया नाले का खतरा बिंदु 70.40 मीटर और अधिकतम जलस्तर 72.59 मीटर है। बदरहुआ नाले का खतरा बिंदु 71.68 मीटर और अधिकतम जलस्तर 73.52 मीटर है। जलस्तर बढ़ने से तटवर्ती गांवों के ग्रामीणों की चिंता बढ़ गई है। संवाद