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कोरोना की मार से तबाह हुए सैलून व पार्लर संचालक

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आजमगढ़। कोरोना संक्रमण की शुरूआत के साथ ही सैलून व पार्लर का कारोबार पूरी तरह से ठप है। जिसके चलते इस कारोबार से जुड़े लोग भुखमरी के कगार पर पहुंच गए है। वहीं शासन-प्रशासन से भी इन कारीगरों को अब तक कोई मदद नहीं मिली है। जिसके चलते परिवार चलाना इनके लिए मुश्किल हो गया है। कुछ कारीगर लोगों के घर-घर जाकर थोड़ा बहुत काम कर रहे है। वहीं ज्यादातर सैलून व पार्लर संचालक फांकाकसी ही कर रही है।
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जिले में साढ़े चार हजार के लगभग सैलून व पार्लर है। जिस पर दस हजार से अधिक कारीगर काम करते है। वहीं नगर पालिका क्षेत्र की बात की जाए तो यहां सैलून व पार्लर की लगभग साढ़े चार सौ दुकानें है। जिस पर एक हजार से अधिक कामगार काम करते है। लॉक डाउन के बाद से ही सैलून व पार्लर बंद है। काम न होने से सैलून व पार्लर संचालक फांकाकसी कर रहे है। इन सैलूनों व पार्लरों पर काम करने वाले कई कारीगर तो भुखमरी के शिकार तक हो गए है और किसी तरह लोगों की मदद व उधारी पर इनका परिवार चल रहा है। जिले में कई बड़े सैलून व पार्लर पर बाहर के प्रदेशों व जनपदों के कामगार भी काम करते है। इसमें से ज्यादातर तो अपने घर लौट चुके है लेकिन जो है उनके समक्ष खाने-पीने की समस्या उत्पन्न हो गई है। कुछ सैलून व पार्लर संचालक अपने कारीगरों को अभी अपने पास से ही भोजन पानी उपलब्ध कराने के साथ ही रखे हुए भी है।
हम सैलून व पार्लर खोले जाने की मांग कर रहे है। जिला प्रशासन को शासन से मिलने वाले एक हजार रुपये की मदद के लिए एक हजार से अधिक कारीगरों के डाटा उपलब्ध कराए गए थे लेकिन अब तक किसी को भी सहायता राशि नहीं मिली है। अब हमें मदद की नहीं बल्कि दुकान खोले जाने के अनुमति की आवश्यकता है।
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अवधेश शर्मा, प्रदेश पदाधिकारी, राजकीय नाई महासभा।
कोरोना संक्रमण के चलते हम सैलून संचालकों का तो काफी बुरा हाल हो गया है। लॉकडाउन के बाद से ही दुकान बंद है, जिसके चलते हम पैसे-पैसे को मोहताज हो गए है। हमारे तीन सैलून चलते है, जिस पर कुल 22 कारीगर काम करते है। दुकान बंद होने के चलते हमें इन्हें बैठा कर खिलाना पड़ रहा है। बड़ी समस्या खड़ी हो गई है।
छोटू भाई, प्रोपराइटर, दर्पण यूनिसेक्स सैलून एंड एकेडमी।
लगन की सारी बुकिंग कैंसिल हो चुकी है। कोई घर बुलाना नहीं चाहता है। लॉक डाउन के चलते हमारा पूरा कारोबार प्रभावित हो कर रह गया है। जल्द से जल्द हमें भी पार्लर खोलने की अनुमति मिलनी चाहिए ताकि भुखों मरने की नौबत न आने पाए। शासन-प्रशासन ने यदि जल्द कोई निर्णय नहीं लिया तो हम बर्बाद हो जाएंगे।
जरीना बानो, संचालिका, दर्पण ब्यूटीपार्लर।
कोरोना ने हमारी रोजीरोटी छीन लिया है। धीरे-धीरे दो माह हो गए है और हमारे पास काम नहीं है। घर-घर जाकर काम करने को भी हम तैयार है पर कोरोना के डर से लोग बुला भी नहीं रहे है। उधारी और लोगों की मदद से किसी तरह खुद व परिवार का जीवन यापन कर रहे है। जल्द हमारी भी दुकाने खुले तो कुछ बात बने।
सोनू शर्मा, सैलून कारीगर।
दो माह से काम पूरी तरह से ठप पड़ा हुआ है। अब तो ग्राहक कोरोना के डर से स्वयं घरों पर ही अपनी दाढ़ी बनाने लगे है। जो जमापूंजी है, उसी से परिवार का खर्च चला रहे है। यदि एक-दो माह और बंदी रह गई तो कई कारीगर भुखमरी के शिकार हो जाएंगे। ऐसे में शासन-प्रशासन को अब हमारे कारोबार को भी खोलने की अनुमति देनी चाहिए।
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श्रवण शर्मा, सैलून संचालक।
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