संदीप सौरभ सिंह
आजमगढ़। समाज कल्याण विभाग के स्कूलों में प्रशिक्षण मुक्ति के फर्जी आदेश पर 20 वर्ष से वेतन ले रहे शिक्षकों पर कार्रवाई न होने पर कमिश्नर ने एडी बेसिक को मूल अभिलेखों के साथ तलब किया है।
जिले में समाज कल्याण विभाग के 83 विद्यालय संचालित हैं। वर्ष 1988 के बाद ये विद्यालय अनुदानित होने शुरू हुए थे। उस समय इन स्कूलों में दसों साल से ऐसे कई शिक्षक कार्यरत थे जिनकी योग्यता आठवीं या दसवीं पास थी। ये अप्रशिक्षित थे।
ऐसे शिक्षकों के लिए प्रशिक्षण एवं अध्यापन में निपुण शिक्षकों के लिए प्रशिक्षण मुक्ति प्रमाण-पत्र देने की योजना शुरू की गई। इसे प्राप्त करनेवाले मानक के मुताबिक पूरा वेतन पाने के हकदार थे। इस मौके का फायदा उठाते हुए विभागीय सांठगांठ से कूटरचित अभिलेख बनाकर कई विद्यालयों के प्रबंधकों ने लंबा वारान्यारा किया।
ऐसे ही एक मामले की शिकायत जुलाई 2016 में भारतीय मानवाधिकार एसोसिएशन के सदस्य अरुण कुमार सिंह ने तत्कालीन जिलाधिकारी से की थी। इसमें उन्होंने एडी बेसिक के कार्यालय से निर्गत एक ही पत्रांक और दिनांक पर जारी दो प्रशिक्षण मुक्ति आदेश संलग्न करते हुए एक को फर्जी बताया था।
विभाग की ओर से दिनांक 13 नंवबर 1997 को पत्रांक संख्या 2883-87 पर हरिजन बाल विद्यामंदिर सैदपुर पर तैनात पांच शिक्षकों को प्रशिक्षण मुक्त दिखाया गया था। इस आदेश का सत्र फर्जी तरीके से 96-97 दिखाया गया है। इसी दिन विभाग से निर्गत 2883-86 पत्रांक पर कई स्कूलों के छह शिक्षकों को प्रशिक्षण मुक्त किया गया था।
मामले की जांच समाज कल्याण अधिकारी राजीव रत्न सिंह ने की। उन्होंने 22 जुलाई के अपने पत्र में हरिजन बाल विद्यामंदिर सैदपुर के पांच शिक्षकों की प्रशिक्षण मुक्ति के आदेश को सही बताया है। मामले की दोबारा शिकायत नौ अगस्त 2016 को फिर जिलाधिकारी से की गई।
इसके बाद समाज कल्याण अधिकारी ने एडी बेसिक से दोनों आदेशों का सत्यापन कार्यालय के अभिलेखों से करने को कहा।
छह जून 2017 को तत्कालीन एडी बेसिक नंदलाल सिंह ने पत्रांक संख्या 2883-86 से जारी छह शिक्षकों के प्रशिक्षण मुक्त के आदेश को सही ठहराया और मामले में आवश्यक कार्रवाई के लिए कहा। इसके बाद भी समाज कल्याण अधिकारी की ओर से फर्जी आदेश पर वेतन पाने वाले हरिजन बाल विद्यामंदिर सैदपुर के तैनात पांच शिक्षकों पर कोई कार्रवाई नहीं की गई।
उन्हें वेतन जारी किया जाता रहा। इस बीच एडी बेसिक नंदलाल के स्थानांतरण के बाद समाज कल्याण अधिकारी ने नए एडी बेसिक योगेंद्र कुमार को फि र से पत्र भेजा और एक ही पत्रांक पर दो आदेशों का हवाला देते हुए कहा कि दोनों आदेशों में समरूपता होने से भ्रांति हो रही है इसलिए दोनों की प्रमाणिकता की जांच जरूरी है।
एडी बेसिक योगेंद्र सिंह ने अपनी जांच में पिछले अधिकारी द्वारा फर्जी बताए गए आदेश को सही और सही को फर्जी बता दिया। इसके बाद भी समाज कल्याण अधिकारी द्वारा किसी आदेश के लाभार्थी शिक्षकों का वेतन नहीं रोका गया।
अपने पद का दुरुपयोग कर वेतन के रूप में शासकीय धन का दुरुपयोग होने दिया गया। अरुण कुमार सिंह ने कमिश्नर से पुन: इसकी शिकायत की जिस पर उन्होंने एडी बेसिक योगेंद्र कुमार को मूल अभिलेखों के साथ अपने आवास पर तलब किया है।
कमिश्नर के. रविंद्र नायक ने बताया कि मामले की शिकायत मिली हैं। एक पत्रांक और दिनांक पर दो आदेश जारी होना समझ से परे हैं। एडी बेसिक को मूल अभिलेखों के साथ तलब किया गया है। दोषी के खिलाफ एफआईआर कराई जाएगी। साथ ही शासकीय धन के हुए गबन की रिकवरी कराई जाएगी।