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बढ़ रहा जलस्तर, कट रही किसानों के खेती की जमीन

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लाटघाट। बनबसा बैराज से छोड़े गए पानी से घाघरा नदी का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। जलस्तर बढ़ने के साथ ही कटान भी तेज हो गई है। शुक्रवार को सैकड़ों एकड़ खेती की जमीन नदी में समा गई। खेती की जमीनों की कटान देख किसानों का कलेजा बैठा जा रहा है।
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सगड़ी तहसील के देवारा क्षेत्र में घाघरा नदी की विनाशलीला जारी है। किसानों की खेती नदी की आगोश में समा जा रही है। शुक्रवार को सैकड़ों एकड़ खेत नदी में समा गए। ग्रामीण आंखों के सामने खेती की जमीन नदी में समाता देखने को विवश हैं। उनका आरोप है कि समय पर प्रशासन की ओर से कटान रोकने के कारगर इंतजाम न किए जाने से स्थिति भयावह हो गई है। सगड़ी तहसील के उत्तर तटवर्ती गांव में घाघरा नदी कटान कर रही है। देवारा खास राजा, गांगेपुर, परसिया के हालात काफी खराब हैं। नदी के मुहाने पर शिवलखन, रोपन, सुभाष, रामशब्द, गिरजा, मुन्ना, राजाराम, राकेश, सूर्यदेव, उदय, राघव के घर आ गए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि कटान रोकने के तत्काल कोई इंतजाम न हुए तो गांव का वजूद मिट सकता है। गांगेपुर के पूर्व प्रधान रामनिवास यादव और अरविंद पांडेय कटान से चिंतित हैं। ये तीनों गांव कटान की जद में आ चुके हैं। घाघरा की कटान रोकने के लिए शासन से 18 करोड़ की परियोजना बनाई गई, जिसमें विभाग को तीन ठोकरों का निर्माण कराना था। निर्माण कार्य शुरू भी कराया गया पर अब कटान काफी तेजी से बढ़ती जा रही है। सगड़ी विधायक वंदना सिंह ने भी कटान स्थल का निरीक्षण किया। उच्चाधिकारियों को अवगत कराया और मानक के विपरीत हो रहे कार्यों की जांच कराई। तब तक घाघरा नदी बढ़ गई और महीनों से काम ठप पड़ा हुआ है। काम अब पूरा होने की संभावना नहीं है। बृहस्पतिवार को घाघरा का जलस्तर डिघिया गेज पर 68.87 मीटर दर्ज किया गया था, जो शुक्रवार को 68.99 मीटर हो गया। वहीं बृहस्पतिवार को बदरहुंआ गेज पर नदी का जलस्तर 69.56 मीटर दर्ज किया गया था, जो शुक्रवार को बढ़कर 69.61 मीटर हो गया।
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