जनपद में फर्जी फर्मों की ओर से जीएसटी में पंजीकरण कर करोड़ों की कर चोरी करने का मामला सामने आया है। राज्य कर विभाग की विशेष अनुसंधान शाखा की जांच में ऐसे तीन फर्मों का भंडाफोड़ हुआ है। इन फर्मों मिलकर सरकार को करीब 19.82 करोड़ रुपये की राजस्व क्षति पहुंचाई है। इन मामलों में संबंधित आरोपियों के विरुद्ध थाना सिधारी में प्राथमिकी दर्ज कराई गई है।
वीआर ट्रेडर्स में 5.12 करोड़ की कर चोरी पकड़ी गई। इस कंपनी का जीएसटी पंजीकरण विकास राठौर, निवासी जियापुर केसरवारा, महमूदाबाद, सीतापुर ने 158 राहुल नगर, मडया के पते पर फर्जी बिजली बिल के आधार पर प्राप्त किया। जांच के दौरान उक्त स्थल पर कोई फर्म संचालित नहीं पाई गई। इनकी ओर से फर्जी बिल जारी कर इस फर्म के माध्यम से 5.12 करोड़ रुपये की कर चोरी की गई।
फर्जी लोहा कारोबारी पर 10.70 करोड़ की कर चोरी पकड़ी गई।
सर्वेश कुमार , निवासी मुड़ाव मुरव्वा, फतेहपुर ने ग्राम सरफुद्दीनपुर, बद्दोपुर के पते पर फर्जी रेंट एग्रीमेंट के जरिये जीएसटी पंजीकरण कराया। मौके की जांच में न तो कोई फर्म मिली और न ही भवन स्वामी ने किसी किरायेदारी की पुष्टि की। इस फर्जी फर्म से लोहे के कारोबार के नाम पर 10.70 करोड़ रुपये के फर्जी बिल जारी किए गए।
लकड़ी के कारोबार में हेराफेरी कर 4 करोड़ की क्षति पहुंचाई गई। आनंद गुप्ता, निवासी जयचंदपुर, रामसनेही घाट, बाराबंकी ने ग्राम अमेठी, लालगंज में फर्जी रेंट एग्रीमेंट बनाकर जीएसटी पंजीयन कराया। जांच में यह फर्म भी फर्जी पाई गई। इस फर्म के जरिये लकड़ी के कारोबार के नाम पर 4 करोड़ रुपये के फर्जी बिल काटे गए। राज्य कर विभाग की जांच में तीनों फर्मों को फर्जी पाए जाने के बाद थाना सिधारी में एफआईआर दर्ज कराई गई है। असिस्टेंट कमिश्नर मैनेजर चौरसिया ने बताया कि मामले की गहन जांच जारी है और आगे और भी नाम सामने आ सकते हैं।
राजस्व की भारी क्षति को देखते हुए वित्तीय अपराध के तहत आगे की कड़ी कार्रवाई की तैयारी की जा रही है।