काफी कोशिशों के बाद मिली सफलता
पूर्व सांसद रमाकांत यादव ने सपा, बसपा, भाजपा सहित सभी प्रमुख दलों का सफर तय किया है। 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले उन्होंने बसपा और सपा में भी ठौर तलाशी थी। सपा के अबू आसिम आजमी उस समय भी पुरजोर तरीके से सक्रिय थे। लेकिन दोनों ही दलों ने उन्हें पार्टी में लेने से मना कर दिया था।
कैसे दूर होगी आपसी खाई?
लखनऊ में रमाकांत यादव के सपा में शामिल होने के समय मंच पर निर्वतमान जिलाध्यक्ष हवलदार यादव के साथ ही विधायक नफीस अहमद और डॉ. संग्राम सिंह यादव भी मौजूद रहे। सपा मुखिया ने उन्हें पार्टी में लेने से पहले ये दिखाने की पूरी तरीके से कोशिश की कि अपने गढ़ आजमगढ़ में सपा में पूरी तरीके से एका है। ये एका स्थायी है कि नहीं इसका पता आने वाले समय में चलेगा।
रमाकांत यादव सर्वाधिक समय समाजवादी पार्टी में रहे। सपा में उन्हें मुलायम सिंह यादव को बेहद करीबी माना जाता था। पहले अमर सिंह बाद में बलराम यादव और दुर्गा यादव जैसे वरिष्ठ सपा नेताओं से उनकी दूरी किसी से छिपी नहीं है। गुटबंदी के कारण ही उन्हें सपा से बाहर जाना पड़ा था। अब 16 साल बाद एक बार फिर रमाकांत यादव की पार्टी में वापसी हुई है। वापसी से जिले के राजनीतिक समीकरण तेजी से बदलेंगे। सपा की राह भी कम मुश्किल नहीं होगी।