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पंजाबी भांड में दिखा व्यंग्य के साथ हास्य

Fri, 18 Mar 2016 11:51 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला, आजमगढ़
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शीलू सिंह राजपूत
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जजी मैदान में आयोजित लोक महोत्सव देशज में तीसरी शाम विभिन्न प्रांतों की लोक विधाओं के नाम रही। शुक्रवार को कार्यक्रम का शुभारंभ पूर्वांचल की माटी की प्रसिद्ध लोक नाट्य कहरवां नृत्य से हुई। इसके बाद, मथुरा की भगत विधा की सुभद्र हरण और राजस्थान के चित्तौड़ के कलाकारों ने तुर्रा कलंगी विधा से मध्य व्यायोग की प्रस्तुति की। दोपहर में नौटंकी की समकालीन चुनौतियां और संभावनाएं पर परिचर्चा की गई।
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कहरवां नृत्य के दौरान जिले के अमारी गांव निवासी अमरजीत और उनकी टीम ने जंघिया नृत्य प्रस्तुत किया। जिसे देखकर बाहरी के साथ स्थानीय लोगों भी स्तब्ध रह गए। इस लोकनृत्य के तुरंत बाद पंजाब से आए मीरासी जाति के कलाकारों ने पंजाब के भांड की प्रस्तुति की। इसमें कलाकारों ने व्यंग्यात्मक शैली से कटाक्ष किया। हास्य का पुट भी मिला। इसे दर्शकों ने काफी सराहा।

शाम पांच बजे के करीब मथुरा के कलाकारों ने भगत विधा में सुभद्रा हरण का मंचन किया। डेढ़ घंटे चले इस मंचन में भगवान कृष्ण द्वारा रचे गए षड्यंत्र की प्रस्तुति की गई। साढ़े छह बजे के करीब रायबरेली से आई शीलू सिंह राजपूत ने साथियों के संग लोक गायन आल्हा की प्रस्तुति अभिनय के साथ की।
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एक घंटे तक मंच रानी लक्ष्मीबाई की उपाधि से नवाजी गई शीलू सिंह राजपूत के नाम रहा। साढ़े सात बजे चित्तौड़ से पधारे नेहरू युवक संस्थान के कलाकारों ने संभाला। इस दौरान वे राजस्थान की 600 वर्ष पुरानी विधा तुर्रा कलंगी के जरिए माध्यम व्यायोग का मंचन किया। इससे पूर्व दो बजे से कांफ्रेंस हाल में विलुप्त होती लोक विधाओं के संरक्षण और पुनर्जीवन पर विशेषज्ञों ने परिचर्चा कर मंथन किया गया।
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