विरोध करने पर सभी लोग घर के अंदर घुस गए और आलमारी तोड़कर उसमें रखे एक लाख बीस हजार रुपये व आभूषण के साथ अन्य सामान लूट लिया। परिजनों को मारा-पीटा व गालियां दी गई। गाड़ी की चाभी जबरन ले ली और गाड़ी में इंद्रजीत यादव व संचित यादव को बैठा कर पुलिस खुद स्कॉर्पियो चलाकर ले गई।
पवई थाने के शफीक के भठ्ठे के निकट नाटी गांव के पास चेकिंग दिखाकर इंद्रजीत यादव व संचित यादव को गंभीर धाराओं में जेल भेज दिया गया। उनके पुत्र विमल यादव को चालक बताकर मौके से भागने की बात कही। उच्चाधिकारियों से शिकायत के बाद भी कोई कार्यवाही नहीं हुई। उसी समय कोविड को लेकर लॉकडाउन लगने से सभी गतिविधियों पर रोक लग गई।
4 जून 2020 को इंद्रजीत व संचित यादव को हाईकोर्ट से जमानत मिल गई। स्कॉर्पियो को अवमुक्त करने के लिए कोर्ट ने 26 जून 2020 को रिपोर्ट मांगी। गाड़ी को अवमुक्त करने को 29 जून 2020 को आदेश की कॉपी पवई थाने पर भेजी गई। तत्कालीन पवई थानाध्यक्ष संजय कुमार ने गाड़ी छोड़ने से मना कर दिया। 29 जून, 23 जून, व 15 सितंबर 2020 को जनपद के उच्चाधिकारियों सहित प्रदेश के डीजीपी व प्रमुख सचिव को पत्र भेजा गया।
जिलाधिकारी आजमगढ़ को गांव के लगभग 10 लोगों के द्वारा शपथ पत्र व प्रमाण पत्र देते हुए घटना को झूठा बताया गया। इस पर भी कार्रवाई न होने पर अक्टूबर 2020 में मामले को 156 (3) के तहत कोर्ट में दाखिल किया गया। जिसमें मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट आजमगढ़ सत्यवीर सिंह की कोर्ट ने 26 सितंबर 2024 को तत्कालीन थाना अध्यक्ष संजय कुमार सहित 15 पुलिस कर्मियों के खिलाफ अहरौला थाना में आदेश से एक सप्ताह के अंदर मुकदमा दर्ज कर न्यायालय को अवगत कराने का आदेश जारी किया।
इस आदेश के बाद भी जब मुकदमा दर्ज नहीं किया गया तो गीता देवी कोर्ट की अवमानना में कोर्ट चली गईं। इस पर अहरौला थाने की पुलिस ने अब जाकर थाने के तत्कालीन थानाध्यक्ष समेत 15 पुलिस कर्मियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है।