एसआईटी की जांच में फर्जी पाए गए 219 मदरसा संचालकों पर अब मुकदमा दर्ज कराया जाएगा। कई मदरसे जमीन पर बने ही नहीं हैं, लेकिन छात्रों का दाखिला दिखाया गया है। बिना मान्यता के भी मदरसे संचालन किए जा रहे हैं।
निदेशक अल्पसंख्यक के आदेश के बाद डीएमडब्ल्यूओ (जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी) ने विशेष जांच दल से फर्जी मदरसों की सूची मांगी है। इससे मदरसा संचालकों में एक बार फिर हड़कंप मच गया है। फर्जी मदरसों की सूची मिलते ही थानों में मुकदमा दर्ज कराया जाएगा।
जिले में वर्ष 2010 में बिना मान्यता संचालित मदरसों का मामला प्रकाश में आया था। मदरसा पोर्टल पर जब मदरसों को अपलोड करवाया गया तो 313 मदरसों के कागजात में गड़बड़ी पाई गई।
इसकी शिकायत शासन तक हुई। प्रदेश में योगी की सरकार बनने के बाद वर्ष 2017 में अस्तित्व विहीन, बिना मान्यता के चल रहे मदरसों की जांच की जिम्मेदारी एसआईटी को सौंपी गई। जांच के दौरान एसआईटी की टीम ने पाया कि 313 में से 219 मदरसे ऐसे हैं जो सिर्फ कागजों में संचालित हैं। मौके पर इनका कोई अस्तित्व ही नहीं है। इनमें से 39 मदरसा संचालक तत्कालीन अधिकारियों, कर्मचारियों से मिली भगत कर आधुनिकीकरण योजना का लाभ भी ले चुके थे।