फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

हरकत में आई पुलिस, शुरू हुई आगे की कार्रवाई

विज्ञापन
विज्ञापन
आजमगढ़। सरायमीर थाना क्षेत्र में 20 अक्तूबर की रात युवती से हुए बलात्कार और मुबारकपुर थाना क्षेत्र के एक गांव में नौ अक्तूबर को बालिका से रेप करने वाले आरोपी के साथ दस अक्तूबर को पंचायत आयोजित कर दोनों की शादी कराने के मामले में पंचायत के निर्णय की मंगलवार को हर तरफ लोग निंदा कर रहे थे। वहीं मुबारकपुर के मामले को दबाने के लिए पंचायत में शामिल लोगों द्वारा 60 हजार रुपये की आरोपी पक्ष से रिश्वत लेने की बात भी सामने आई है। दोनों थानों की पुलिस अपनी जान बचाने के लिए आगे की कार्रवाई करने में जुट गई है।
विज्ञापन

अमर उजाला ने मंगलवार को मुबारकपुर थाने में पंचायत के तुगलकी फरमान को प्रमुखता से प्रकाशित किया। मुबारकपुर क्षेत्र की रहने वाली बच्ची के गांव वालों की मानें तो घटना के बाद पीड़ित परिवार ने थाने में तहरीर दी थी। इसके आधार पर पुलिस ने बलात्कार की धारा की बजाय छेड़खानी, धमकी देने और पाक्सो एक्ट के तहत तीन आरोपियों के विरुद्ध रिपोर्ट दर्ज की। गांव वालों के मुताबिक 10 अक्तूबर को गांव के संभ्रांत लोग किशोर के पक्ष में खड़े होकर पंचायत कर दोनों की शादी कराने का निर्णय लिया। यह शादी गांव में स्थित काली मंदिर पर करवाई गई। इस दौरान किशोर के घर वालों ने बच्ची को उपहार के तौर पर कुछ आभूषण भी दिया। गांववालों के मुताबिक पंचायत में आरोपी पक्ष को बचाने के लिए 60 हजार की डील होने के भी आरोप लग रहे हैं। पाक्सो एक्ट की धारा में केस दर्ज होने पर पीड़िता का मेडिकल और कमलबंद बयान दर्ज कराना अनिवार्य है, जो अब तक नहीं हो सका है। पुलिस की ओर से भी गोलमोल जवाब दिया जा रहा है।
वहीं, सरायमीर थाना क्षेत्र में पंचायत द्वारा युवती की आबरू की कीमत दो लाख रुपये लगाने का मामला संज्ञान में आने पर मंगलवार को सरायमीर थाने की पुलिस पीड़ितों को थाने बुलाई, लेकिन देर शाम तक वे लोग थाने नहीं आ सके थे, न ही कोई पंचायत में शामिल रहा व्यक्ति ही थाने पहुंचा था। प्रभारी निरीक्षक शेरसिंह तोमर ने बताया कि सभी को नोटिस भेजकर बुलाया गया है। इंतजार किया जा रहा।
विज्ञापन

000
पाक्सो एक्ट के मामले में पीड़िता का मेडिकल मुआयना और अदालत में कलमबंद बयान दर्ज कराना अनिवार्य है। किसी भी नाबालिग की शादी कराना कानून जुर्म है। ऐसे मामले में शामिल दोषियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई का प्रावधान है।
- वेद प्रकाश वर्मा, संयुक्त निदेशक अभियोजन
पंचायत के फैसले की हर ओर निंदा
--बीते कुछ दिनों में ताबड़तोड़ सुनाए गए फैसले
--पुलिस की उदासीनता भी पाया गया प्रमुख कारण
अमर उजाला ब्यूरो
आजमगढ़। मुबारकपुर, सरायमीर और तहबरपुर थाना क्षेत्र में बीते एक सप्ताह के भीतर गांव में आयोजित पंचायत में दिए गए अजीबो-गरीब फैसले की हर ओर निंदा हो रही है। वहीं कुछ लोग गांव में होने वाली पंचायत और पंचों द्वारा लिए गए फैसले के लिए पुलिस को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। लोगों का कहना है कि पुलिस ऐसे मामलों में कार्रवाई की बजाय परेशान करती है। जिससे बचने के लिए लोग पंचायत का सहारा लेते हैं।
जिले में पिछले कुछ दिनों के भीतर गांव में पंचायत के दौरान लिए जाने वाले फैसले व्यवस्थाओं पर सवाल उठाने लगे हैं। अभी कुछ दिनों पहले ही तहबरपुर थाना क्षेत्र के एक गांव में सगोत्रीय विवाह पर पंचायत ने परिवार को बहिष्कृत करने का फैसला ले लिया था। अब मुबारकपुर थाना क्षेत्र में रेप के मामले में युवक और बालिका की शादी कराने के फैसले ने जिले में चर्चाओं के बाजार को गर्म कर दिया है। हालांकि इस फैसले के लिए जितनी जिम्मेदारी गांव के पंचों की है। उससे अधिक जवाबदेही पीड़ित बच्ची और आरोपी के मां बाप की भी है। जिन्होंने सुलह कर ली। वहीं लड़के के घर वाले अपने बच्चे का मन अपराध की ओर बढ़ा रहे हैं ।वहीं पुलिस भी यह कहकर पल्ला झाड़ लेती है कि शिकायत मिलने पर कार्रवाई करेंगे।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें