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जनपद में प्लाज्मा डोनेट करने को लेकर उदासीन बने हैं लोग

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आजमगढ़। जिस प्रकार रक्तदान करके किसी व्यक्ति की जान बचाई जा सकती है। उसी प्रकार किसी कोरोना संक्रमित के पाजीटिव से निगेटिव होने के बाद प्लाज्मा डोनेट करने से किसी कोरोना संक्रमित की जान बचाई जा सकती है। लेकिन इसके बाद भी जनपद में प्लाज्मा डोनेट करने से लोग बच रहे हैं। पिछले वर्ष और इस वर्ष में अब तक सिर्फ एक व्यक्ति गांधीगिरी टीम के संयोजक विवेक पांडेय ने प्लाज्मा दान किया है।
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चिकित्सकों का मानना है कि कोरोना से संक्रमित होने के बाद ठीक होने वाले व्यक्ति के शरीर में इसके प्रति एंटी प्रतिरोधक क्षमता विकसित हो जाती है। जिसके कारण वह काफी दिनों तक कोरोना के संक्रमण से मुक्त हो जाता है। ऐसे में यदि कोरोना के संक्रमण से मुक्त हुए व्यक्ति का प्लाज्मा किसी कोरोना संक्रमित को दिया जाए तो उसके स्वस्थ्य की संभावना बढ़ जाती है। जनपद में अब तक हजारों लोग कोरोना से संक्रमित हुए और इलाज के बाद स्वस्थ भी हुए लेकिन प्लाज्मा का दान करने के लिए कोई भी व्यक्ति सामने नहीं आया। सिर्फ पिछले साल कोरोना से संक्रमित हुए व्यक्ति ने ठीक होने के बाद अपना प्लाज्मा दान किया था। जिसमें मेडिकल कालेज चक्रपानपुर में भर्ती एक मरीज को दिया जा चुका है।
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