वर्तमान में पूरे जिले में लोग बुखार से पीड़ित हैं। मंडलीय अस्पताल में चिकित्सकों की ओपीडी में प्रतिदिन 30 से 40 मरीज बुखार से पीड़ित होकर पहुंच रहे हैं। इन बुखार पीड़ितों का प्लेटलेट्स काफी तेजी से गिर रहा है। जिसके कारण जिले में प्लेटलेट्स की डिमांड काफी बढ़ गई है। एक दिन में जहां 15 से 20 यूनिट प्लेटलेट्स की डिमांड होती थी वहीं अब यह बढ़कर 40 से 45 हो चुकी है।
जनपद में संदिग्ध बुखार पीड़ितों की संख्या काफी अधिक है। जनपद का शायद ही कोई घर हो जिसमें बुखार पीड़ित नहीं हैं। किसी-किसी घर में तो पूरा परिवार ही बुखार से पीड़ित है। सबसे बड़ी बात तो यह है कि इस बुखार से पीड़ितों का तेजी से प्लेटलेट्स गिर रहा है।
जिसके कारण उनकी हालत खराब हो जा रही है। जब यह प्लेटलेट्स गिरकर 20 हजार से नीचे आ जा रहा है तो मरीज को प्लेटलेट्स चढ़ाने की जरूरत पड़ रही है। जिसका परिणाम है जिला अस्पताल स्थित ब्लड बैंक में प्लेटलेट्स की डिमांड काफी बढ़ गई है। सामान्य दिनों में जहां 15 से 20 यूनिट प्लेटलेट्स प्रतिदिन निकलता था वहीं अब यह बढ़कर 40 से 45 यूनिट तक पहुंच गया है।
बुधवार को ब्लड बैंक में मात्र 12 यूनिट प्लेटलेट्स पाया गया। जबकि ब्लड बैंक में एक दिन में कुल 30 से 32 यूनिट प्लेटलेट्स तैयार किया जाता है। इसके खराब होने की संभावना को देखते हुए जरूरत के हिसाब से ही प्लेटलेट्स निकाला जाता है। क्योंकि पांच से छह दिन के बाद यह खराब हो जाता है।
10 हजार से कम प्लेटलेट्स होने पर पड़ेगी चढ़ाने की जरूरत
मंडलीय अस्पताल के फिजिशियन डा. आरके कुशवाहा की मानें तो किसी व्यक्ति के शरीर में सामान्य तौर पर 1.50 से लाख से 4.50 लाख तक प्लेटलेट्स होते हैं। बुखार के दौरान मरीज का प्लेटलेट्स गिरता है। यह हर मरीज में सामान्य तौर पर होता है। इससे घबराने जैसी कोई बात नहीं होती। लेकिन अगर प्लेटलेट्स 10 हजार से नीचे पहुंचे तो प्लेटलेट्स चढ़ाने की जरूरत पड़ती है।