ग्राम पंचायतों में अब पंचायत सहायकों की भूमिका केवल प्रशासनिक कार्यों तक सीमित नहीं रहेगी। वे गांवों में ग्राम उद्यमी तैयार करने और युवाओं व महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ने में भी मदद करेंगे।
इसके तहत पात्र उद्यमियों को बैंक के माध्यम से ऋण उपलब्ध कराने की व्यवस्था है। पंचायतीराज विभाग की ओर से इस संबंध में निर्देश जारी किए गए हैं।
जिले के 22 विकास खंडों की 1810 ग्राम पंचायतों में तैनात पंचायत सहायक अभी तक ग्राम सचिवालय के संचालन, ई-ग्राम स्वराज, पंचायत गेटवे पोर्टल और ग्राम पंचायत विकास योजनाओं की ऑनलाइन फीडिंग जैसे कार्य करते रहे हैं।
नई जिम्मेदारी के तहत उन्हें गांव के युवाओं, महिलाओं, स्वयं सहायता समूहों और इच्छुक लोगों को सरकारी योजनाओं से जोड़ना होगा। वे स्वरोजगार शुरू करने के इच्छुक लोगों को ऋण, प्रशिक्षण, विपणन और विभिन्न विभागों की सहायता योजनाओं की जानकारी देंगे। साथ ही उन्हें संबंधित विभागों और बैंकों तक पहुंचाने में सहयोग करेंगे।
नई जिम्मेदारी के निर्वहन के लिए पंचायत सहायकों को सात दिवसीय प्रशिक्षण दिया जाएगा। ग्रामोद्योग प्रशिक्षण केंद्रों के माध्यम से होने वाले इस प्रशिक्षण में उन्हें ग्रामीणों को उद्यम स्थापना के लिए प्रेरित करने और सरकारी योजनाओं की जानकारी देने के तरीके बताए जाएंगे।
यह पहल पंचायत ग्रामीण उद्योग रोजगार योजना के तहत लागू की जा रही है। योजना का उद्देश्य गांवों में रोजगार के अवसर बढ़ाना, बेरोजगारी कम करना और युवाओं के शहरों की ओर पलायन को रोकना है।
डीपीआरओ कुमार अमरेंद्र ने बताया कि पंचायत सहायकों को ग्राम उद्यमी तैयार करने की जिम्मेदारी देने के संबंध में निर्देश मिले हैं। इसके तहत स्वरोजगार के इच्छुक ग्रामीणों का चयन कर उन्हें योजनाओं से जोड़ने में मदद की जाएगी। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ने के साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है।