आजमगढ़। जिले में दो दर्जन भर राजकीय माध्यमिक विद्यालय है लेकिन मात्र आधा दर्जन ही ऐसे है जो यूपी बोर्ड परीक्षा केंद्र के लिए निर्धारित मानक को पूरा करते है। माध्यमिक शिक्षा विभाग अपने ही विद्यालयों को परीक्षा केंद बनने लायक संसाधन उपलब्ध नहीं करा पा रहा है, जिसके चलते ही इन राजकीय विद्यालयों की दशा खराब हो रही है।
उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद ने सोमवार को फरवरी में होने वाली बोर्ड परीक्षा के लिए केंद्रों की सूची जारी किया। 273 विद्यालयों की इस सूची में जिले के मात्र आधा दर्जन राजकीय विद्यालयों को ही परीक्षा केंद्र बनाया गया है। इसके पीछे कारण अन्य राजकीय विद्यालयों में संसाधनों का आभाव बताया जा रहा है। जिले के मात्र 7 राजकीय माध्यमिक विद्यालय ही ऐसे है जो वायस रिकार्डर युक्त सीसीटीवी से लैस है। इनमें भी मात्र एक राजकीय विद्यालय पर ही राउटर व हाईस्पीड इंटरनेट की सुविधा उपलब्ध है। बोर्ड ने इस बार उन्हीं विद्यालयों को परीक्षा केंद्र बनाने का निर्णय लिया है जिसमें सभी कक्षों में वायस रिकार्डर युक्त सीसीटीवी के साथ ही राउटर व हाईस्पीड इंटरनेट की सुविधा उपलब्ध हो। यह व्यवस्था इस लिए की गई है ताकि बोर्ड अथवा उच्चाधिकारी जब चाहे ऑन लाइन किसी भी परीक्षा केंद्र का औचक निरीक्षण कर सके। माध्यमिक शिक्षा विभाग अपने ही विद्यालयों की दशा सुधार नहीं पा रहा है। राजकीय विद्यालयों में जहां शिक्षकों की कमी हैऱ् तो वहीं संसाधनों का भी आभाव है। ऐसे में माध्यमिक शिक्षा विभाग एडेड व वित्त विहीन विद्यालयों के भरोसे बोर्ड परीक्षा का संचालन करा रहा है।