शहर के बदरका मुहल्ले में परिषदीय विद्यालय।-प्लान खबर की फोटो
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परिषदीय स्कूलों के जर्जर भवन बेसिक शिक्षा विभाग के लिए परेशानी का कारण बने हैं। परिषदीय विद्यालय भले ही बंद चल रहे हैं लेकिन अध्यापकों की उपस्थिति नियमित है। जर्जर भवनों में काम करते समय हादसे का डर उन्हें सताता रहता है। शासन स्तर से जर्जर पड़े विद्यालयों के भवनों के ध्वस्तीकरण का आदेश जारी किया था। इसके बाद भी अभी तक विद्यालयों के जर्जर भवनों को ध्वस्त नहीं कराया जा सका। ऐसे में बच्चे-अभिभावक और शिक्षकों में हादसे का डर बना हुआ है।
जिले में 2702 परिषदीय विद्यालय हैं। इनमें प्राथमिक 1737, कंपोजिट 481 व उच्च प्राथमिक 484 विद्यालय हैं। 434 विद्यालयों के भवन जीर्ण-शीर्ण अवस्था में हैं। हालांकि उक्त जर्जर भवनों में कक्षाएं तो नहीं संचालित होती है लेकिन स्कूल परिसर में ही जर्जर भवन होने से घटना होने का भय बना रहता है। ऐसे में शासन ने जर्जर पड़े विद्यालयों के भवनों को ध्वस्त कराने के लिए निर्देश दिया था। बावजूद इसके अभी तक भवनों का ध्वस्तीकरण नहीं हो सका। बेसिक शिक्षा विभाग की आंकड़ों पर गौर करें तो 434 जर्जर भवनों में से करीब 400 विद्यालयों का मूल्यांकन किया जा चुका है। इनमें से करीब 145 विद्यालयों के जर्जर भवनों को ध्वस्त कराया जा सका है। वहीं बाकी में मूल्यांकन व नीलामी की समस्या से अटकी पड़ी है।
ध्वस्तीकरण के लिए गठित हुई थी समिति
शासन के निर्देश पर ध्वस्तीकरण के लिए स्वीकृत भवन की नीलामी के लिए खंड शिक्षा अधिकारी की अध्यक्षता में समिति का गठन किया गया है। इसमें सहायक वित्त एवं लेखाधिकारी, समग्र शिक्षा तथा सहायक विकास अधिकारी, पंचायत सदस्य बनाए गए हैं।
नीलामी में कोई नहीं पहुंचा
जिले में जर्जर पड़े विद्यालयों का मूल्यांकन कराया जाता है। इसके बाद नीलामी की कार्रवाई होती है। विभाग की ओर से जिले के ऐसे कई विद्यालयों की नीलामी कराई गई जहां कोई पहुंचा ही नहीं। इसके लिए उच्चाधिकारियों को पत्र भी लिखे जाने की बात कही जा रही है।
ब्लाक स्तर पर गठित समिति जर्जर पड़े करीब 434 विद्यालयों में से 400 विद्यालयों का मूल्यांकन कर चुकी है। करीब 145 विद्यालयों का ध्वस्तीकरण भी किया जा चुका है। बहुत जल्द ही बाकी के जर्जर पड़े विद्यालयों का ध्वस्तीकरण कराया जाएगा।-अतुल सिंह, बेसिक शिक्षा अधिकारी, आजमगढ़।