डिप्रेशन और चिंता की वजह से मानसिक रोगियों की संख्या लगातार बढ़ रही है। जिला अस्पताल में इस समय मानसिक रोग विशेषज्ञ नहीं हैं। इसके चलते प्रतिदिन बड़ी संख्या में मरीजों को वापस लौटना पड़ रहा है।
जिला अस्पताल की ओपीडी में एक माह पहले तक प्रतिदिन 40 से 50 मरीज पहुंचते थे। मानसिक रोग विशेषज्ञ के अस्पताल छोड़ने के बाद से अब तक कोई अन्य चिकित्सक तैनात नहीं हुआ है। यहां मरीजों को दवाओं के साथ-साथ काउंसलिंग भी की जाती थी।
इसका उद्देश्य मानसिक स्वास्थ्य संबंधी मुद्दों के प्रति जागरूकता बढ़ाना और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी भ्रांतियों को दूर करना रहा। चिकित्सकों का कहना है कि किसी बात को बार-बार सोचने से बचना चाहिए।
जिला अस्पताल में मानसिक रोगियों के उपचार के लिए मन कक्ष बनाया गया है। मानसिक रोग विशेषज्ञ डॉ. सुमित सिंह के मुताबिक, काम के दबाव और चिंता से लोग अवसाद का शिकार हो रहे हैं।
ऐसे लोगों को एकांत में रहने से बचना चाहिए और परेशानी होने पर उपचार कराना चाहिए। एसआईसी डॉ. सतीशचंद्र कन्नौजिया ने बताया कि मन कक्ष में मानसिक रोग विशेषज्ञ मरीजों का उपचार करने के साथ काउंसलिंग भी करते थे। इस समय इस रोग के चिकित्सक अस्पताल में नहीं हैं। निदेशालय को सूचना दे दी गई है।