लाटघाट। बारिश के मौसम में घाघरा की कटान से प्रतिवर्ष महुला गढ़वल बांध के उत्तर स्थित कृषि योग्य और आबादी वाली भूमि कटकर नदी की धारा में विलीन हो जाती है। बाढ़ के समय महुला गढ़वल बांध भी कटने का खतरा बना रहता है। पिछली बार कटे ठोकरों को बनाने का कार्य बाढ़ खंड ने शुरू किया लेकिन अभी एक भी ठोक नहीं बन सका है जिससे ग्रामीणों में रोष है।
पिछले वर्ष आई बाढ़ में टेकनपुर में बंधा तीन अगस्त को कट गया था जिससे चौतरफा हाहाकार मच गई थी। सैकड़ों घर और हजारों एकड़ धान की फसल पूरी तरह से चौपट और बर्बाद हो गई थी। बंधा टूटने की खबर पर उप्र सरकार के दो मंत्रियों ने मौके का निरीक्षण किया। विरोधी नेताओं ने भी जमकर राजनीति की। बंधे पर स्पर निर्माण के लिए सरकार से धन अवमुक्त कराने का देवारा वासियों को आश्वासन दिया था। इस वर्ष बाढ़ आने के पूर्व ही मार्च महीने में शासन द्वारा नदी की कटान को रोकने के लिए तीन स्पर के निर्माण के लिए धन अवमुक्त किया गया। जिससे ठोकरों का निर्माण शुरू हो गया है। एसडीएम सगड़ी गौरव कुमार ने स्पर निर्माण का निरीक्षण किया। कार्य की धीमी प्रगति पर बाढ़खंड को तेजी लाने का निर्देश दिया। एक्सईएन बाढ़ खंड को एक हफ्ते के अंदर ही किसानों की जमीनों की रजिस्ट्री कराने के लिए निर्देशित किया गया है ताकि किसानों का पैसा भी समय से आ जाए। वहीं कार्य की धीमी प्रगति को लेकर ग्रामीणों में रोष है। लोगों का कहना है कि अभी तक एक भी ठोकर का निर्माण पूरा नहीं हो सका है। इस संबंध में परसिया गांव के प्रधान राजेश यादव ने बताया कि ठोकर निर्माण के लिए अपनी जमीन रजिस्ट्री ना होने के बाद भी निर्माण कार्य के लिए दे दिया गया है पर बाढ़ खंड, ठेकेदार की लापरवाही चरम पर है। गांगेपुर मठिया गांव के पूर्व प्रधान रामनिवास यादव ने बताया कि ठोकर निर्माण में किसी प्रकार की कहीं से कोई जमीन को लेकर दिक्कत नहीं है। जमीन पहले ही दे दिया गया है पर विभाग द्वारा लापरवाही की जा रही है। जो किसानों को भारी पड़ेगी।