वर्षों से हक की लड़ाई लड़ रहे प्रशिक्षु शिक्षकों के लिए शनिवार का दिन कुछ खास रहा। जाफरपुर जूनियर हाईस्कूल परिसर में सुबह से ही गहमागहमी शुरू हो गई थी।
हालांकि पहले दिन नि:शक्त और महिला प्रशिक्षु शिक्षकों को ही नियुक्ति पत्र मिलना था पर इस अवसर का गवाह बनने के लिए बड़ी संख्या में पुरुष प्रशिक्षु भी परिसर में मौजूद थे।
नियुक्ति पत्र मिलने में देरी और पत्र पाने के बाद सपने पूरे होने का उम्मीदों भरा उल्लास हर प्रशिक्षु शिक्षक के चेहरे पर दिख रहा था। छोटे- छोटे समूहों में खड़े होकर बतियाते युवा बाबुओं की लेटलतीफी पर खुन्नस भी जता रहे थे तो आगे का प्लान भी साझा कर रहे थे।
दिन में 10.12 बजे के करीब ज्योंहि पहले प्रशिक्षु शिक्षक अर्चना सिंह की पुकार हुई, वहां खड़े लोगों में हर्ष और उल्लास की लहर दौड़ गई। 10.42 बजे जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी राकेश कुमार से पहला नियुक्ति पत्र के बाद बाहर निकलने पर अर्चना को बधाइयों का तांता लग गया।
फिर तो एक के बाद एक प्रशिक्षुओं को अभिलेखों की जांच कराने और पत्र पाने का सिलसिला शुरू हो गया। नियुक्ति पत्र लेकर बाहर आने वाले महिला और उसके परिवार वालों की खुशियां देखते ही बन रही थी। नियुक्ति पत्र पाकर कई खुशी के मारे रो पड़ रहे थे तो कोई खिलखिलाते हुए जा रहा था। ।
नियुक्ति पत्र का वितरण शनिवार की देर रात तक चलता रहा। परिवार के साथ आई एक महिला आशा, जिसका घर जिला मुख्यालय से करीब 45 किमी दूर स्थित है, ने कहा कि रात में किसी होटल में रूकना मंजूर है, लेकिन बिना नियुक्ति पत्र लिए नहीं जाऊंगी।