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Azamgarh News: न भवन न छात्र, 22 और मदरसा प्रबंधकों पर दर्ज हुआ मुकदमा

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आजमगढ़। जनपद में संचालित मदरसा संचालकों द्वारा सरकार को लाखों रुपये का चूना लगाया गया है। ऐसे 22 और मदरसा प्रबंधकों पर मंगलवार को मुकदमा दर्ज किया गया। इन मदरसों का न तो भवन का पता है और न ही इनके छात्रों का। सरकार से मिलने वाले अनुदान का लाभ लेने के लिए इनमें से कई प्रबंधक को दो से चार मदरसों का संचालन कर रहे थे। इनके द्वारा फर्जी शिक्षकों के नाम पर भी सरकार से धन लिया जा रहा था। इस बात का खुलासा एसआईटी ने अपनी जांच रिपोर्ट में किया है।
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जिले में अब तक फर्जी मदरसा संचालकों के खिलाफ 41 मुकदमे दर्ज हो चुके हैं। एसआईटी की जांच रिपोर्ट को देखें तो सिर्फ कागजों में ही मदरसों का संचालन हो रहा था और सरकार से लाखों रुपये का अनुदान लिया जा रहा था। इतना ही नहीं इन मदरसों में फर्जी तरीके से शिक्षकों की तैनाती भी गई थी। हर मदरसे में दो से तीन ऐसे शिक्षक भी तैनात किए गए थे। इतना ही नहीं एक प्रबंधक दो से चार मदरसों का संचालन करता था। पहले दिन जहां कंधरापुर थाने में एक मुकदमा दर्ज हुआ था। वहीं दूसरे 22 मुकदमे दर्ज हुए। इसके बाद तीसरे दिन छह मुकदमे दर्ज हुए। वहीं चौथे दिन मंगलवार को 22 मदरसा प्रबंधकों पर धोखाधड़ी और गबन का मुकदमा दर्ज किया गया। जिसमें अहरौला थाने में दो, जीयनपुर में सात, सरायमीर में दो, दीदारगंज में दो, निजामाबाद में चार, मेंहनगर में एक, मुबारकपुर में तीन, गंभीरपुर में एक और पवई में एक मदरसा प्रबंधक के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया।
एसपी ग्रामीण चिराग जैन ने बताया कि जनवरी 2023 में शासन द्वारा एक जांच एसआईटी से कराई गई थी। इसमें जिले के कई जो पोर्टल पर दर्ज थे उनमें से 219 मदरसे अस्तित्वविहीन पाए गए थे। इनके द्वारा फर्जी तरीके से सरकारी अनुदान लेकर उसका उपयोग किया जा रथा। इसके बाद शासन की ओर से इनके खिलाफ मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिया गया। इस पर ईओडब्ल्यू के इंस्पेक्टर कुंवर ब्रह्म प्रकाश सिंह ने थानों में तहरीर दी गई है। जिस पर मुकदमा दर्ज किया जा रहा है।
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