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Azamgarh News: भूजल का दम घोंट रही लापरवाही, 200 से अधिक कुएं बने कूड़ाघर

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बरदह गांव में गणेश तिवारी के घर के सामने बदहाल पड़ा प्राचीन कुआं। संवाद - फोटो : सुहाग नगर ​स्थित चिकित्सक के अस्पताल के बाहर ​ब्लिकिंट कर्मी से बातचीत करते सुहाग नगर चौकी इंचार्ज। संवाद
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प्राकृतिक जलस्रोतों के संरक्षण के लिए एक ओर अभियान चलाए जा रहे हैं और अमृत सरोवरों पर करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर जिले के 200 से अधिक पुराने कुएं बदहाली का शिकार हैं।
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कभी लोगों की प्यास बुझाने वाले ये पारंपरिक जलस्रोत अब कूड़ाघर में तब्दील होते जा रहे हैं। कहीं इनमें कूड़ा-करकट और सड़े-गले माला-फूल भरे हैं, तो कहीं मिट्टी और झाड़-झंखाड़ के कारण इनका अस्तित्व मिटने की कगार पर है।
करीब डेढ़ वर्ष पूर्व शासन की ओर से कुओं के संरक्षण की योजना बनाई गई थी। योजना के तहत कुओं का सर्वे कर उन्हें चिह्नित करना था। इसके बाद उनके संरक्षण के लिए काम कराया जाना था, लेकिन अधिकारियों की लापरवाही के चलते योजना फाइलों में ही अटक कर रह गई।
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नतीजा यह है कि जिले की 1810 ग्राम पंचायतों में 200 से अधिक कुएं बदहाल पड़े हुए हैं। कुओं की सफाई और संरक्षण की समुचित व्यवस्था नहीं होने से इनका पारंपरिक उपयोग लगभग समाप्त होता जा रहा है। कई स्थानों पर कुओं के आसपास झाड़ियां और पेड़-पौधे उग आए हैं।
वहीं, खुले और जर्जर कुएं लोगों के लिए हादसों का खतरा भी बने हुए हैं। ऐसे में इनके आसपास रहने वाले लोगों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बनी हुई है।
एक तरफ भूजल स्तर को बनाए रखने और जलस्रोतों को पुनर्जीवित करने पर जोर दिया जा रहा है, तो दूसरी तरफ पुराने कुओं की अनदेखी संरक्षण के दावों पर सवाल खड़े कर रही है। इन जलस्रोतों की उपेक्षा से उनकी उपयोगिता खत्म होने के साथ पारंपरिक जल संरचनाएं भी धीरे-धीरे नष्ट हो रही हैं।
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सीन- 1
150 साल पुराने कुएं में भर दिया कूड़ा
अतरौलिया। लोहरा गांव में 150 वर्ष से अधिक पुराना कुआं संरक्षण के अभाव में बदहाल पड़ा है। कभी उपयोगी रहा यह जलस्रोत अब कूड़े से पट चुका है। लोगों ने इसकी सफाई और संरक्षण करने के बजाय इसमें कूड़ा फेंकना शुरू कर दिया, जिससे इसका अस्तित्व मिटने की कगार पर है।
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सीन- 2
घर के सामने बदहाल पड़ा 200 साल पुराना कुआं
बरदह। बरदह गांव में गणेश तिवारी के घर के सामने करीब 200 वर्ष पुराना कुआं देखरेख के अभाव में बदहाल है। लंबे समय से इसकी सुध नहीं ली गई है। संरक्षण और सफाई के अभाव में यह ऐतिहासिक जलस्रोत अपनी उपयोगिता खोता जा रहा है।
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सीन- 3
कुएं में पानी, लेकिन पूजा सामग्री से हो रहा प्रदूषित
बरदह। क्षेत्र के जखावा ग्राम पंचायत भवन के सामने करीब 250 वर्ष पुराना कुआं है। इसमें अभी कुछ पानी मौजूद है, लेकिन लोग इसमें फूल-माला, नारियल, चुनरी और अन्य पूजा सामग्री फेंक रहे हैं। हालांकि, किसी के अंदर गिरने से बचाव के लिए कुएं के ऊपर पटिया रखी गई है, लेकिन पानी को स्वच्छ रखने के लिए सफाई और संरक्षण की जरूरत है।
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सीन- 4
कूड़ा फेंकते-फेंकते पाट दिया कुआं
मुबारकपुर। सठियांव विकासखंड की इब्राहिमपुर पंचायत के उत्तर मोहल्ले में मस्जिद के पास करीब 200 वर्ष पुराना कुआं था। आसपास के लोग उसमें लगातार कूड़ा फेंकते रहे। धीरे-धीरे कुआं भर गया और करीब 25 वर्ष पहले उसका अस्तित्व समाप्त हो गया। इसके बाद किसी ने भी इस पुराने जलस्रोत की सुध नहीं ली।
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सीन- 5
रहट की जगह कूड़े और झाड़-झंखाड़ का जमावड़ा
लाटघाट। केशोपुर गांव में करीब 120 वर्ष पुराना कुआं है। कभी यहां रहट चलती थी, जिससे पानी निकाला जाता था। समय के साथ इसका संरक्षण बंद हो गया और लोगों ने इसमें कूड़ा फेंकना शुरू कर दिया। अब कुएं में गंदगी और झाड़-झंखाड़ जमा हो रहे हैं। देखरेख के अभाव में यह पारंपरिक जलस्रोत बदहाली का शिकार है।
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सीन- 6
150 साल से अधिक पुराने कुएं का अस्तित्व संकट में
अंबारी। पवई ब्लॉक के बसही गांव में 150 वर्ष से अधिक पुराना कुआं उपेक्षा का शिकार है। इसकी लंबे समय से देखरेख नहीं की गई। लोगों ने इसमें कूड़ा फेंकना शुरू किया, जिससे यह गंदगी से पट गया। सफाई और संरक्षण के अभाव में गांव का यह पुराना जलस्रोत अपना अस्तित्व खोता जा रहा है।
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बोले लोग-
फोटो संख्या-
हमने अपने बुजुर्गों से सुना है कि पहले गांव के लोग इसी कुएं से पानी लेते थे। समय के साथ इसकी देखरेख बंद हो गई। नतीजा यह हुआ कि कुआं पूरी तरह से पट गया और उसका नामोनिशान ही समाप्त हो गया। प्रशासन को ऐसे पुराने जलस्रोतों को बचाने के लिए पहल करनी चाहिए, ताकि आने वाली पीढ़ियां भी इन्हें देख सकें। -शमसुज्जोहा, इब्राहिमपुर।
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फोटो संख्या-
कुएं के आसपास झाड़-झंखाड़ उग आए हैं और इसकी हालत भी खराब है। कुआं कूड़े से पूरी तरह से पटा पड़ा है। इसकी सफाई, मरम्मत और नियमित देखरेख होनी चाहिए। ग्राम पंचायत और संबंधित विभागों को ऐसे कुओं की सूची बनाकर संरक्षण की कार्ययोजना तैयार करनी चाहिए। - संजू सोनी, लोहरा।
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पंचायती राज विभाग की ओर से करीब डेढ़ वर्ष पहले कुओं के संरक्षण के लिए योजना शुरू की गई थी। इसके तहत कुओं का सर्वे कर उन्हें चिह्नित करने और संरक्षण के इंतजाम करने थे। इस संबंध में अपने स्तर से जांच कराएंगे कि जिले में योजना की क्या स्थिति है और अब तक कितना काम हुआ है। -राकेश कुमार पटेल, मुख्य विकास अधिकारी, आजमगढ़।

बरदह गांव में गणेश तिवारी के घर के सामने बदहाल पड़ा प्राचीन कुआं। संवाद- फोटो : सुहाग नगर स्थित चिकित्सक के अस्पताल के बाहर ब्लिकिंट कर्मी से बातचीत करते सुहाग नगर चौकी इंचार्ज। संवाद

बरदह गांव में गणेश तिवारी के घर के सामने बदहाल पड़ा प्राचीन कुआं। संवाद- फोटो : सुहाग नगर स्थित चिकित्सक के अस्पताल के बाहर ब्लिकिंट कर्मी से बातचीत करते सुहाग नगर चौकी इंचार्ज। संवाद

बरदह गांव में गणेश तिवारी के घर के सामने बदहाल पड़ा प्राचीन कुआं। संवाद- फोटो : सुहाग नगर स्थित चिकित्सक के अस्पताल के बाहर ब्लिकिंट कर्मी से बातचीत करते सुहाग नगर चौकी इंचार्ज। संवाद

बरदह गांव में गणेश तिवारी के घर के सामने बदहाल पड़ा प्राचीन कुआं। संवाद- फोटो : सुहाग नगर स्थित चिकित्सक के अस्पताल के बाहर ब्लिकिंट कर्मी से बातचीत करते सुहाग नगर चौकी इंचार्ज। संवाद

बरदह गांव में गणेश तिवारी के घर के सामने बदहाल पड़ा प्राचीन कुआं। संवाद- फोटो : सुहाग नगर स्थित चिकित्सक के अस्पताल के बाहर ब्लिकिंट कर्मी से बातचीत करते सुहाग नगर चौकी इंचार्ज। संवाद

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