आजमगढ़। एसडीएम सदर रावेंद्र सिंह द्वारा जहानागंज विकास खंड के किशुनपुर गांव में निर्मित गौशाला का निरीक्षण शनिवार को किया गया। निरीक्षण के दौरान छह पशुओं के शव वहां पाए गए। साथ ही कई और कमियां भी मिली। उनके द्वारा उपलब्ध कराई गई रिपोर्ट के आधार पर ग्राम विकास अधिकारी यशोवर्धन सिंह को दोषी मानते हुए जिला विकास अधिकारी ने निलंबित करते हुए जहानागंज विकास खंड मुख्यालय से संबंद्घ कर दिया।
अपनी रिपोर्ट में एसडीएम ने बताया कि निरीक्षण के समय गौशाला में 243 गायें थी। जिसमें से 223 गायों को टैग लगाया गया था जबकि 20 पशुओं का जीयो टैग नहीं कराया गया था। गौशाला के दक्षिणी और पश्चिमी छोर पर छह गोवंशीय पशुओं के शव और काफी संख्या में पशुओं की हड्डियां बिखरी हुई मिली। दक्षिणी छोर पर मृत पशुओं को दफनाने के लिए गड्ढ़ा खोदा हुआ था जिसमें पानी भरा था। पशुओं के शव 10 से 15 दिन पुराने लग रहे थे। पूछने पर ग्राम विकास अधिकारी ने बताया कि दो माह पूर्व ही उन्होंने कार्यभार ग्रहण किया है। उनके द्वारा हर दूसरे दिन गौशाला का निरीक्षण किया जाता है। कुल 243 गोवंश हैं लेकिन मौके पर रजिस्टर नहीं है। आडिट के लिए गया है। टैगिंग का रजिस्टर चिकित्साधिकारी के पास है। चार अगस्त को तीन पशुुओं के मरने की लिखित सूचना बीडीओ को दी गई थी। उनके कार्यकाल में 20 पशु मरे हैं। उन्होने बताया कि चार अगस्त के बाद किसी पशु की मौत नहीं हुई है। वहीं सफाई कर्मी विनोद कुमार यादव ने बताया कि पिछले शनिवार से 10 गोवंश की मौत हो चुकी है। मृत पशुओं के पोस्टमार्टम के संबंध में भी ग्राम विकास अधिकारी कुछ नहीं बता सके। जिससे यह पता चलता है कि ग्राम विकास अधिकारी द्वारा अपनी जिम्मेदारियों का सही तरीके से निर्वहन नहीं किया गया है। जिसके लिए इन्हें दोषी मानते हुए इनके विरुद्घ अनुशासनात्मक कार्रवाई संस्थित करते हुए निलंबित कर विकास खंड जहानागं से संबद्घ किया जाता है। इसकी जांच के लिए खंड विकास अधिकारी तरवां को जांच अधिकारी नियुक्त करते हुए 15 दिन के अंदर जांच आख्या उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया है।