शिया-सुन्नी दंगे से छिनी कारोबार की रंगत
लगभग 25 वर्ष पूर्व नवंबर 1999 को कस्बे में शिया सुन्नी दंगा भड़क गया, जिसके चलते क्षेत्र के लोगों में भय की स्थिति उत्पन्न हो गई। एक बार पुनः जनवरी सन 2000 में शाम के समय मार्केट के दौरान सीरियल बम ब्लास्ट हो गया, जिसमें दर्जन भर लोगों की हत्या हुई। इस घटना से बाहरी व्यापारियों का आवागमन बंद हो गया। व्यापारियों का कस्बे में आना बंद हुआ कि कारोबार बुरी तरह से बैठ गया। जो आज तक उबर नहीं सका है।
रॉ मटेरियल के बढ़े दामों ने तोड़ी कमर
दंगे के बाद कारोबार तो शुरू हुआ लेकिन साड़ियों को तैयार करने में उपयोगी रॉ मटेरियल रेशम, ज़री आदि के भाव में उछाल के चलते आम बुनकर परेशान हो गया। इससे वह क्षेत्र के बड़े व्यवसाइयों से रॉ मटेरियल लेकर औने पौने दाम पर उन्हीं व्यवसाइयों को बेंचकर अपने परिवार की जीविका चलाने पर विवश हो गया। धीरे धीरे कर हथकरघा उद्द्योग क्षेत्र के पूंजीपतियों के हाथों में सिमटता चला गया। विपणन केंद्र बना, लेकिन वह भी बेमतलब साबित हो रहा है।