आजमगढ़। मुकद्दस रमजान के 30वें रोजे पर बृहस्पतिवार को ईद का चांद नजर आया। सभी ने हाथ उठाकर त्योहार के सही सलामत गुजर जाने की दुआ मांगी। चांद का दीदार करने के साथ ही लोगों ने एक दूसरे को सलाम कर ईद-उल-फितर की मुबारकबाद दी। ईद के मद्देनजर घरों में तैयारियां चलती रहीं।
मौलाना अब्दुल रहीम ने बताया कि कोरोना संक्रमण के कारण इस बार भी ईद-उल-फित्र की नमाज ईदगाह में नहीं होगी। सभी लोग अपने घरों में ही नमाज-ए-चाश्त (नमाज ए नफिल) दो रेकअत अदा करेंगे। उन्होंने बताया कि ईदगाह में जमात के साथ इमाम द्वारा जायद छह तकबीरों के साथ दो रकाअत वाजिब अदा की जाती है। कहा कि नमाज-ए-ईदुल-फित्र अल्लाह की बहुत बड़ी रहमत है। अल्लाह फरमाता है रमजान मेरा महीना है। मैं इसकी जजा इनाम खुद दूंगा। इसलिए ईद का दिन बहुत ही मुबारक दिन है। ईद की नमाज ईदगाह में ना पढ़े जाने का जहां मलाल है। वहीं पूरे 30 रोजे मिलने की खुशी भी देखी जा रही है। कोरोना संक्रमण के कारण लगे लॉकडाउन से पाबंदियां हैं। पूरा रमजान का महीना लॉकडाउन में गुजरा है। ऐसा पहली बार है जब दुनिया भर में मुसलमान अपने सबसे बड़े त्योहार ईद-उल-फित्र की नमाज मस्जिद या ईदगाह पर नहीं बल्कि घर में ही अदा करेंगे। कोरोना संक्रमण के कारण इस बार लोगों की ईद भी फीकी पड़ गई है। लॉकडाउन के कारण लोग नए कपड़े भी नहीं बनवा सके। वहीं अपनों से भी नहीं मिल पाएंगे।