जिले में निजी और सरकारी अस्पतालों के पास ही खुले में बायोवेस्ट (मेडिकल कचरा) डंप किया जा रहा है। इससे संक्रमण फैलने की आशंका बढ़ गई है।
विभाग के जिम्मेदारों की आंखें बंद हैं। अस्पताल वाले बायोवेस्ट के निस्तारण के बजाय उसे पन्नी में भरकर कूड़े के ढेर में फेंक दे रहे हैं। संवाद न्यूज एजेंसी की टीम ने रविवार को पांच प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और भदोही नगर के तीन निजी अस्पतालों के पास कूड़े के ढेर की पड़ताल की।
भदोही एमबीएस अस्पताल के पास बायोवेस्ट खुले में डंप मिला। इसके बाद टीम महजूदा, हरिहरपुर, चकटोडर, लालानगर, दुर्गागंज, डेरवां पीएचसी पहुंची। महजूदा में सुई, दवा की सीसी, ग्लूकोज का बॉटल केंद्र के पीछे फेंका हुआ मिला। पीएचसी के कर्मचारियों के मुताबिक, पीएचसी परिसर में मेडिकल कचरा के लिए कोई व्यवस्था नहीं है।
25 दिन बाद मेडिकल कचरे को जला दिया जाता है। डेरवां, हरिहरपुर केंद्र के पास भी मेडिकल कचरा डंप मिला। भदोही नगर के रजपुरा और इंदिरा मिल के पास तीन निजी अस्पतालों के पास भी खुले में मेडिकल कचरा मिला। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, जिले में 235 सरकारी अस्पताल और 140 निजी नर्सिंग होम, क्लीनिक, अस्पताल संचालित है। इसके अलावा 45 पैथोलॉजी सेंटर हैं, 100 से अधिक इनकी शाखाएं हैं। जिले भर में अनुमानित रोजाना 60 किलो बायोवेस्ट (मेडिकल कचरा) निकलता है।
वाराणसी में होता है मेडिकल कचरे का निस्तारण : जिले में मेडिकल कचरा निस्तारण के लिए प्लांट नहीं हैं। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का दावा है कि मेडिकल वेस्ट का कचरा उठाने के लिए जिला अस्पताल, एमबीएस में वाराणसी से गाड़ी आती है। मेडिकल कचरा के निस्तारण के लिए वाराणसी की एक संस्था नामित है।
जो रोजाना बायोवेस्ट कलेक्ट करती है। पीएचसी पर निस्तारण की व्यवस्था नहीं है। यहां चार फीट गहरे गड्ढे में मेडिकल वेस्ट को डिस्पोज किया जाता है या सीएचसी भेजा जाता है।
कागजों पर सीमित स्वास्थ्य विभाग की सख्ती : शासन के निर्देशानुसार अस्पतालों में सफाई की विशेष व्यवस्था होनी चाहिए। यहां से निकलने वाला मेडिकलवेस्ट को एक स्थान पर एकत्र करना चाहिए। खुले में फेंकने में निस्तारण के लिए नामित संस्था को देना चाहिए। महजूदा पीएचसी पर आए मरीज विजय कुमार, उमेश कुमार, अजीत यादव, अनिल बिंद आदि ने बताया कि अस्पताल परिसर में सफाई है, लेकिन केंद्र के पीछे गंदगी है। स्वास्थ्य समिति की बैठकों में भी डीएम मेडिकल कचरे के निस्तारण को लेकर निर्देश देते हैं। विभाग की सख्ती कागजों तक ही सीमित है।