आजमगढ़। महिला आयोग की सदस्य डाॅ . प्रियंका माैर्या से मिल कर कई महिलाएं परेशानी बता कर रो पड़ीं। इसके बाद उन्होंने उन्हें ढांढस बंधाते हुए कहा कि मैं हूं न। डाॅ . प्रियंका माैर्या ने कहा कि महिलाओं के साथ घरेलू हिंसा ज्यादा हो रही है। उनको आगे आकर हक की लड़ाई लड़नी चाहिए। न्याय दिलाने के लिए महिला आयोग हमेशा आगे रहेगा। किसी भी तरह उन्हें कोई परेशानी नहीं होनी चाहिए। महिला आयोग सदस्य बुधवार को विकास भवन के सभागार में महिला कल्याण विभाग की ओर से आयोजित जनसुनवाई में बोल रही थीं।
उन्होंने आगे कहा कि कुछ महिलाएं अपनी लड़ाई लड़ती हैं, जबकि कुछ समाज के डर से चुप्पी साध लेती हैं। ऐसे में उनके साथ घरेलू हिंसा होती रहती है। इस मौके पर जिला प्रोबेशन अधिकारी, सीओ गौरव शर्मा सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहें।
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बेटी हूं आपकी, एसडीएम से बात करती हूं...
लालगंज निवासी महिला पति और ससुराल वालों से काफी प्रताड़ित थी। जनसुनवाई में वह रोने लगी। डॉ. प्रियंका मौर्या ने कहा कि आप रोइए मत, अपनी बात कहिए। आप की बेटी हूं। एसडीएम से बात करती हूं। इसके बाद उन्होंने एसडीएम से बात कर समस्या के समाधान को कहा।
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हम समस्या किससे कहें
जनसुनवाई के दौरान डॉ. प्रियंका मौर्या ने कई बार सीएमओ को पूछा लेकिन स्वास्थ्य विभाग का कोई अधिकारी मौजूद नहीं था। जबकि स्वास्थ्य विभाग को पहले बताया गया था। इसको लेकर वह काफी नाराज दिखीं। उन्होंने फोन पर सीएमओ से बात करते हुए कहा कि महिला आयोग का कोई मतलब नहीं हैं क्या? इसके बाद उन्होंने कहा कि हम अपनी समस्या कहां दर्ज कराएं। इस मामले में नोटिस दिया जाएगा। ये लापरवाही है।
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एक सप्ताह में लेते हैं फीडबैक
समस्याओं के निराकरण के लिए डॉ. प्रियंका मौर्या ने संबंधित कई अधिकारियों से फोन पर बात करके उचित कार्रवाई का निर्देश दिया। इस दौरान दो दर्जन से अधिक शिकायत आईं। इसमें ज्यादातर शिकायतें घरेलू हिंसा की थीं। उन्होंने बताया कि एक सप्ताह में समस्याओं का फीडबैक भी लेते हैं।
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महिला अस्पताल के निरीक्षण में मिली लापरवाही
राज्य महिला आयोग की सदस्य ने बुधवार सुबह 10 बजे जिला महिला अस्पताल का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्हें अस्पताल में कई कमियां मिलीं, इसमें सुधार का अस्पताल प्रशासन को निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि झांसी में हुई घटना के बाद लापरवाही देखने को मिल रही है। डॉ. प्रियंका मौर्या ने जिला महिला चिकित्सालय की व्यवस्था को देखकर चौंक गईं। उन्होंने मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. विनय सिंह यादव से भी पूछताछ की और वहां भर्ती महिला मरीज व उनके परिजनों से भी जानकारी ली। कई गड़बड़ी मिलने पर उन्होंने मुख्य चिकित्सा अधीक्षक को व्यवस्था में सुधार लाने का निर्देश दिया। अस्पताल में नवजात बच्चों की मौत हुई थी, उसको लेकर सबसे पहले सिलिंडर की जांच की गई। सिलिंडर में मैन्युफैक्चरिंग डेट तो लिखी मिली लेकिन एक्सपायरी डेट नहीं थी। इसके अलावा भर्ती महिला से बात की तो उन्होंने बताया कि टीका लगवाने का यहां पर 10 रुपये से लेकर 50 रुपये तक वसूली की जाती है। जबकि यह निशुल्क है। इसके अलावा उनके सामने ही परिसर में गलियारों में कुत्ते घूमते नजर आए। दो डॉक्टर भी उपस्थित नहीं थी। इसकी किसी को जानकारी भी नहीं थी।