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Azamgarh News: महाराजा सुहेलदेव विश्वविद्यालय में एक क्लिक पर मिलेगा विद्यार्थियों का शैक्षणिक इतिहास

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चक्रपानपुर। महाराजा सुहेलदेव विश्वविद्यालय ने अपने लाखों विद्यार्थियों के शैक्षणिक दस्तावेजों को डिजी लॉकर प्लेटफॉर्म से जोड़कर डिजिटल क्रांति की दिशा में ऐतिहासिक कदम उठाया है। अब छात्र-छात्राएं अपने अंकपत्र, डिग्री और प्रमाणपत्र एक क्लिक में प्राप्त कर सकेंगे। मोबाइल एप और आधार नंबर से यह सुविधा छात्रों को कहीं भी, कभी भी उपलब्ध रहेगी।
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विश्वविद्यालय की इस पहल से जहां छात्रों को कागजी झंझटों से मुक्ति मिलेगी, वहीं नियोक्ताओं और संस्थानों के लिए सत्यापन प्रक्रिया भी बेहद आसान हो जाएगी। कुलाधिपति एवं उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल के मार्गदर्शन में शुरू की गई यह पहल राज्य में डिजिटल शिक्षा के मॉडल के रूप में उभर रही है।
इस वर्ष समर्थ पोर्टल के माध्यम से एक लाख से अधिक छात्रों का पंजीकरण हुआ है, जिनमें से 93 हजार से अधिक ने विभिन्न पाठ्यक्रमों में नामांकन कराया है। छात्र आदित्य प्रताप ने कहा पहले दस्तावेज सत्यापन में महीनों लगते थे, अब यह कुछ ही मिनटों में संभव हो गया है। हालांकि, ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट की उपलब्धता और डिजिटल साक्षरता अभी भी चुनौती बनी हुई है। विश्वविद्यालय प्रशासन का मानना है कि जैसे-जैसे डिजी लॉकर का उपयोग बढ़ेगा, शिक्षा का लोकतंत्रीकरण होगा और एक राष्ट्र, एक डिजी लॉकर का सपना साकार होगा जहां विद्यार्थी कागजों की बाधाओं से मुक्त होकर अपने सपनों की उड़ान भर सकेंगे।
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सभी छात्रों के शैक्षणिक दस्तावेज डिजी लॉकर में समावेशित कर दिए गए हैं। छात्र मोबाइल से एप डाउनलोड कर, आधार नंबर से लॉगिन और विश्वविद्यालय चयन कर अपने रोल नंबर से दस्तावेज प्राप्त कर सकते हैं। डिजी लॉकर को कानूनी मान्यता प्राप्त है, इसे अतिरिक्त सत्यापन की आवश्यकता नहीं पड़ेगी।- डा. दिलीप वर्मा, नोडल अधिकारी, आईटी सेल।
डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन से न केवल समय की बचत होगी, बल्कि विद्यार्थियों को वैश्विक अवसरों से जोड़ने में मदद मिलेगी। आईटी सेल की टीम अब तक 61,456 नामांकित छात्रों के दस्तावेज डिजी लॉकर पर अपलोड कर चुकी है, शेष कार्य प्रगति पर है। यह पहल नई शिक्षा नीति के डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर लक्ष्य को मजबूती प्रदान करेगी। - प्रो. संजीव कुमार, कुलपति महाराजा सुहेलदेव विश्वविद्यालय आजमगढ़।
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