पशुओं को वर्षभर हरा चारा उपलब्ध कराने के लिए जिले में पहली बार नेपियर घास की खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है। उत्तर प्रदेश चारा विकास नीति के तहत जिले के 30 प्रगतिशील किसानों का चयन किया गया है।
पशुपालन विभाग की ओर से इन किसानों को सीतापुर से नेपियर घास की जड़ें उपलब्ध कराई जाएंगी। किसान अपने खेतों में इसकी रोपाई करेंगे। इसके लिए सरकार की ओर से किसानों को कुल चार हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि भी दी जाएगी।
उत्तर प्रदेश चारा विकास नीति के तहत वित्तीय वर्ष 2028 तक बारहमासी हरे चारे की उपलब्धता सुनिश्चित करने की योजना बनाई गई है। इसी के तहत जिले में नेपियर घास की खेती शुरू की जा रही है।
बारिश के मौसम में इसकी रोपाई कराई जाएगी, ताकि पर्याप्त नमी मिलने से घास की अच्छी बढ़वार हो सके। नेपियर घास तेजी से फैलती है और कुछ समय में खेत के बड़े हिस्से को कवर कर लेती है। इसकी खासियत यह है कि एक बार रोपाई के बाद लंबे समय तक हरा चारा उपलब्ध कराया जा सकता है।
जड़ उपलब्ध कराने पर किसानों को मिलेगा लाभ
नेपियर घास की खेती को बड़े स्तर पर बढ़ावा देने के लिए चयनित किसानों से बाद में इसकी जड़ें भी ली जाएंगी। किसान अपनी फसल से तैयार जड़ों को पशुपालन विभाग को उपलब्ध कराएंगे। विभाग इन जड़ों को अन्य किसानों तक पहुंचाएगा, जिससे जिले में धीरे-धीरे नेपियर घास का रकबा बढ़ाया जा सके।
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गोशालाओं से अनुबंध कर बेच सकेंगे हरा चारा
किसानों के लिए नेपियर घास उत्पादन आय का जरिया भी बन सकता है। किसान आसपास की गोशालाओं से अनुबंध कर वहां हरे चारे की आपूर्ति कर सकेंगे। इससे गोशालाओं में वर्षभर हरे चारे की समस्या दूर करने में मदद मिलेगी और किसानों को अपनी उपज का बाजार भी मिल सकेगा। पशुपालन विभाग की योजना है कि आने वाले समय में अधिक किसानों को इससे जोड़ा जाए, ताकि जिले में पशुओं के लिए बारहमासी हरे चारे की उपलब्धता सुनिश्चित हो सके।
-वर्जन
उत्तर प्रदेश चारा विकास नीति के तहत जिले के 30 किसानों का चयन किया जा रहा है। जिन्हें सीतापुर से लाकर किसानों को वितरित करना है। इसके बाद इन किसानों से घास लेकर अन्य किसानों को वितरित की जाएगी। इसके लिए किसानों को चार हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि भी दी जा रही है।
डॉ. मुकेश गुप्ता, सीवीओ।