आजमगढ़। उर्वरक की कालाबाजारी को रोकने के लिए कृषि विभाग द्वारा प्रतिमाह अधिक उर्वरक की खरीदारी करने वाले 20 किसानों और अधिक उर्वरक की बिक्री करने वाले दुकानदारों को चिन्हित कर उनकी जांच की जाती है। इसी क्रम में पांच सदस्यीय कमेटी द्वारा की गई जांच के बाद प्रस्तुत रिपोर्ट में दोषी मिलने पर नौ उर्वरक की दुकानों का लाइसेंस निरस्त कर दिया गया है। जबकि एक औद्यानिक समिति को डिबार घोषित कर दिया गया है। साथ ही छह समितियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई का निर्देश दिया गया है।
एक तरफ बुआई और टाप ड्रेसिंग के समय में किसान उर्वरक की समस्या से जूझते रहते हैं। समितियों से उर्वरक न मिलने पर उन्हें बाजार से ऊंचे दामों पर उर्वरक की खरीद करनी पड़ती है। इस पर लगाम लगाने के लिए प्रतिमाह उर्वरक की अधिक खरीद करने वाले टाप 20 किसानों और उसके विक्रेताओं को चिन्हित कर जांच की जाती है। इसी क्रम में कृषि विभाग की ओर से अधिक उर्वरक खरीदने वाले 20 लोगों को चिन्हित किया गया था। इसकी जांच के लिए पांच सदस्यीय कमेटी गठित की गई थी। कमेटी ने जांच करके अपनी रिपोर्ट सौंपी। इस रिपोर्ट में दोषी पाए गए लोगों के खिलाफ उप कृषि निदेशक द्वारा कार्रवाई की गई है। उप निदेशक कृषि और जिला कृषि अधिकारी डा. उमेश कुमार गुप्ता ने बताया कि नौ उर्वरक विक्रेताओं का लाइसेंस निरस्त किया जा रहा है। छह समितियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई का निर्देश दिया गया है। जबकि एक औद्योगिक इकाई को डिबार घोषित कर दिया गया है। जांच में 18 लोग दोषी पाए गए थे। जिसमें से दो लोगों के ऊपर पहले से ही एफआईआर दर्ज है।