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एसटीपी के लिए जमीन खरीद को शासन से मिली हरी झंडी

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आजमगढ़। जनपद में काफी दिनों से एसटीपी निर्माण के लिए सरकारी भूमि की तलाश जिला प्रशासन द्वारा की जा रही है, लेकिन उसे भूमि नहीं मिल रही है। नगर से सटे पटखौली गांव में जिला प्रशासन ने भूमि मिली थी, लेकिन वह कुछ कम हैं। इसके लिए किसानों से जमीन खरीद के लिए जलनिगम की ओर से शासन से अनुमति मांगी गई थी, जो अब मिल चुकी है। अनुमति मिलने के बाद जलनिगम अब भूमि की तलाश में जुट गया है।
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नगर से निकलने वाले गंदे पानी के ट्रीटमेंट के लिए काफी दिनों से एसटीपी की जरूरत महसूस की जा रही है, ताकि नगर से निकलने वाले गंदे पानी को इससे जोड़कर उसका ट्रीटमेंट कर नदी में छोड़ा जा सके। इसके लिए काफी दिनों से जिला प्रशासन द्वारा जमीन की तलाश की जा रही है। पहले जिला प्रशासन और जल निगम की ओर से धर्मूनाले के पास जमीन देखी गई थी। इस जमीन एसटीपी का प्रस्ताव शासन को भेजा गया। लगभग 42 करोड़ का प्रस्ताव मंजूर भी हुआ। लेकिम जमीन कुछ कम थी। इस कारण टेंडर निरस्त कर पूरी जमीन की व्यवस्था के निर्देश दिए गए थे। इसके बाद अगल-बगल के किसानों से जमीन खरीदने की कोशिश की गई, लेकिन जमीन नहीं मिली।
पठखौली के किसानों से जमीन की मांग की गई लेकिन उनके द्वारा अपनी जमीन का सर्किल रेट से सवा चार गुना धनराशि दिए जाने की मांग की जाने लगी। इस पर जल निगम की ओर से विभाग के एमडी से दूसरी जगह जमीन की खरीद करने की अनुमति मांगी गई, जो अब उसे प्राप्त हो गई है। अनुमति मिलने केे बाद अब एसटीपी निर्माण के लिए जरूरी 0.40 हेक्टेयर जमीन की तलाश में जल निगम जुट गया है। इसके लिए जल निगम के अधिशासी अभियंता की ओर विज्ञप्ति जारी की गई। जिसमें उनके द्वारा हाफिजपुर चौराहे से लेकर बैठौली गांव तक जमीन होने, आवागमन के लिए रास्ता और बिक्री के इच्छुक किसानों से अभिलेख के साथ संपर्क करने का अनुरोध किया है।
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जल निगम ने राजा किला के पास भी देखी है चारागाह की भूमि
जल निगम और प्रशासन द्वारा भूमि की तलाश में राजा जी किला के पास भी एक जमीन देखी गई है। यह जमीन चारागाह की है। जिसका प्रस्ताव तैयार कर इसका लैंड यूज चेंज करने के लिए प्रस्ताव तैयार किया गया था। लेकिन अभिलेखों की कमी के कारण अभी इसे शासन को भेजा नहीं जा सकी है। एसडीएम छुट्टी पर हैं इसलिए उनके आने के बाद ही अभिलेखों की कमी को पूरा कर प्रस्ताव शासन को भेजा जाएगा।
एसटीपी निर्माण के लिए पूर्व में पठखौली में 0.20 हेक्टेयर भूमि मिली थी। जबकि एसटीपी के लिए 0.40 हेक्टेयर भूमि की जरूरत है। लेकिन यह जमीन एसटीपी निर्माण के लिए पर्याप्त नहीं थी। किसानों से जमीन मांगी गई तो उनके द्वारा सर्किल रेट सवा चार गुना मुआवजा मांगा गया। जिसके लिए निदेशक से दूसरी जमीन खरीदने की अनुमति मांगी गई थी। जो उन्होंने प्रदान कर दी है। -रणविजय सिंह, अधिशासी अभियंता जलनिगम।
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