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लालगंज महोत्सव की अंतिम निशा रही बृजेश और कंचन के नाम

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लालगंज महोत्सव में कार्यक्रम प्रस्तुत करते बृजेश शांडिल्य। - फोटो : AZAMGARH
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लालगंज। आजमगढ़ महोत्सव के क्रम में आयोजित लालगंज महोत्सव का मंगलवार देर रात समापन हो गया। महोत्सव के अंतिम दिन देर शाम बृजेश शांडिल्य, कंचन श्रीवास और अरुण सिंह अनाड़ी ने अपने गीतों से लोगों को झूमने के लिए विवश कर दिया।
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लालगंज महोत्सव के अंतिम दिन की रात गायकी के नाम रही जिसमें गायक बृजेश शांडिल्य ने ‘ऐसे लहरा के वो रूबरू आ गई, आंख उनकी लड़ी यूं मेरी आंख से...’, ‘मेरे रश्के कमर तूने पहली नजर...’, ‘वो करम खुदाया है तुझे मैंने पाया है, तुझ पे मर कर ही मुझे जीना आया है...’ सुनाकर लोगों को थिरकने पर मजबूर किया। वहीं कंचन श्रीवास ने लोगों को अपने गीतों पर देर रात तक झूमने के लिए विवश किया। उन्होंने ‘मैनू एक पल चैन ना आए सजना तेरे बिन...’ सुनाया। वहीं जब उन्होंने ‘दिल दिया गल्ला...’ सुनाया तो लोग झूम उठे। इसके बाद भोजपुरी गायक अरुण सिंह अनाड़ी ने अपने भोजपुरी गीतों पर लोगों को झूमने के लिए विवश किया।

लालगंज महोत्सव में कार्यक्रम प्रस्तुत करती कंचन श्रीवास।- फोटो : AZAMGARH

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