10 सरायमीर स्थित मदरसा इस्लामिया अरबिया बैतूल उलूम में दो दिवसीय वार्षिक सभा का में मौजूद लोग
सरायमीर। मदरसा इस्लामिया अरबिया बैतूल उलूम में बुधवार को दो दिवसीय वार्षिक सभा का पहला सत्र शुरू हुआ। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में पहुंचे जमीयत उलेमा-ए-हिंद के प्रमुख मौलाना महमूद मदनी ने कहा कि इस्लाम सिर्फ इबादत का नाम नहीं, बल्कि एक मुकम्मल जीवन शैली है। उन्होंने कहा कि इंसान का सिर झुकाने से कुछ नहीं होता, असल झुकाव दिल का होना चाहिए।
मौलाना मदनी ने कहा कि अल्लाह ने दुनिया इंसान के लिए बनाई है, लेकिन इंसान को आखिरत के लिए पैदा किया है। जो व्यक्ति दुनिया को ही सब कुछ समझ लेता है, वह मौत से डरता है, जबकि आखिरत को मकसद बनाने वाला मौत से नहीं घबराता। उन्होंने कहा कि दुनिया और दीन एक-दूसरे से अलग नहीं, नियत को ठीक करके दुनिया को भी दीन बनाया जा सकता है।
सभा में मौलाना अबू तालिब रहमानी ने कहा कि इस्लाम की बेटियों ने हर दौर में इस्लाम का नाम रोशन किया है। उन्होंने कहा कि शादी में खूबसूरती के बजाय अच्छे अखलाक और किरदार को तरजीह देनी चाहिए। उन्होंने युवाओं और बच्चियों को निगाहें नीची रखने की सलाह देते हुए कहा कि इससे घरों की इज्जत और समाज की पवित्रता कायम रहती है।
मौलाना महबूब आलम कासमी ने कहा कि आज बेटियों का दूसरे धर्मों की ओर झुकाव बढ़ना तरबियत की कमजोरी और दीन से दूरी का नतीजा है।