आजमगढ़। भारतीय ज्ञान-परंपरा और सांस्कृतिक धरोहर के वैश्विक उत्सव के रूप में अंतरराष्ट्रीय रामायण महासम्मेलन 2025 का आयोजन लालगंज में होगा। यह 12 से 14 अप्रैल तक हाइडिल मोड़ में होगा। श्रीरामनवमी के उपलक्ष्य में यह कार्यक्रम भारतीय संस्कृति और रामायण के दर्शन को विश्व मंच पर स्थापित करने का एक प्रयास है।
आयोजन की संयोजक डॉ. अपर्णा सिंह ने बताया कि इस वर्ष सम्मेलन का मुख्य विषय भारतीय ज्ञान परंपराएं एवं सांस्कृतिक धरोहर, आधुनिक प्रबंधन के सिद्धांत, दर्शन और व्यवहार होगा। इसमें भारत और विदेशों से विद्वान, शोधकर्ता, प्राध्यापक, लेखक, संस्कृतिकर्मी, रामायण मर्मज्ञ और प्रबंधन विशेषज्ञ हिस्सा लेंगे। सम्मेलन का उद्देश्य रामायण के गहन दर्शन, नैतिक मूल्यों, नेतृत्व सिद्धांतों और राम राज्य की अवधारणा को आधुनिक संदर्भ में प्रस्तुत करना है। कार्यक्रम का शुभारंभ 12 अप्रैल को शाम 4 बजे होगा। मुख्य अतिथि के रूप में भगवान श्रीराम और माता जानकी की प्रतीकात्मक उपस्थिति होगी, जबकि विशिष्ट अतिथि के रूप में मारुतिनंदन हनुमान जी को आमंत्रित किया गया है। आयोजन में अंतरराष्ट्रीय स्तर के विद्वानों के व्याख्यान, विभिन्न भाषाओं में रामायण की प्रस्तुतियां, सांस्कृतिक कार्यक्रम, भजन-कीर्तन, कथावाचन और कला प्रदर्शनी भी शामिल है।
शोध आधारित स्मारिका और पुस्तक का विमोचन भी होगा। देश-विदेश के विश्वविद्यालयों और संगठनों से जुड़े शोधार्थी और प्रतिनिधि इस आयोजन को और भव्य बनाएंगे।
प्रतिदिन 200 से अधिक अतिथियों की उपस्थिति अपेक्षित है। सामाजिक कार्यों में योगदान के लिए कई संस्थानों और व्यक्तियों को रामदूत अवार्ड्स दिया जाएगा।
पंजीकरण प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और शिक्षाविदों, शोधार्थियों, विद्यार्थियों, कलाकारों व रामकथा प्रेमियों से इसमें शामिल होने का आह्वान किया गया है।