अहरौला। मानव जीवन में प्रोटीन की महत्ता को देखते हुए दलहनी फसलों का उत्पादन बढ़ाना समय की आवश्यकता बन गया है। शरीर के निर्माण और रोग प्रतिरोधक क्षमता को बनाए रखने में प्रोटीन की अहम भूमिका होती है।
इसी क्रम में आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, कुमारगंज, अयोध्या के कुलपति डॉ. बिजेंद्र सिंह के दिशा-निर्देशन में कृषि विज्ञान केंद्र, लेदौरा द्वारा जनपद के किसानों के सहयोग से अरहर की बोआई को लेकर जागरूकता और अभियान चलाया जा रहा है। कृषि विज्ञान केंद्र, लेदौरा के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष डॉ. एलसी वर्मा ने बताया कि जिले में मानसून की दस्तक हो चुकी है, ऐसे में खरीफ फसलों की बोआई का समय आ गया है। उन्होंने कहा कि खरीफ ऋतु की सबसे प्रमुख दलहनी फसल अरहर है और वर्तमान समय इसकी बोआई के लिए अत्यंत उपयुक्त है। मेड़ पर अरहर की बोआई से किसानों को प्रति हेक्टेयर 28–30 क्विंटल तक उपज मिल सकती है।
चुनें रोग प्रतिरोधी प्रजातियां : केंद्र के सस्य वैज्ञानिक डॉ. शेर सिंह ने किसानों को सलाह दी कि वे अरहर की उच्च उत्पादक एवं रोग प्रतिरोधी प्रजातियां जैसे आईपीए-203, नरेंद्र अरहर-2 तथा राजेंद्र अरहर-1 का चयन करें।