जनपद के उत्तरी सीमा से होकर गुजरने वाली घाघरा नदी का जलस्तर तीन दिनों से खतरे के निशान के ऊपर है। बाढ़ चौकियां तो सक्रिय हो गई हैं लेकिन ब्लाक और स्वास्थ्य कर्मी बाढ़ चौकियों पर नहीं पहुंच रहे हैं। जबकि पशुपालन विभाग की टीम गांव में पशुओं का टीकाकरण करने में जुटी है।
सगड़ी तहसील के देवरांचल से होकर जाने वाली घाघरा एक बार फिर से तबाही मचाने को तैयार है। नदी तीन दिनों से लगातार खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। गुरुवार को भी नदी के जलस्तर में बढ़ोतरी जारी रही। परसिया रेगुलेटर से बुधवार से ही पानी का रिसाव हो रहा है लेकिन अभी तक बाढ़ खंड ने रिसाव को बंद नहीं किया है। रेगुलेटर से रिसाव को देख ग्रामीणों में भय व्याप्त है।
वहीं अभी तक बाढ़ खंड का कोई भी अधिकारी और कर्मचारी महुला-गढ़वल बांध पर नहीं पहुंचा है। जिससे ग्रामीणों में रोष व्याप्त है। महुला-गढ़वल बांध के उत्तर बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में 146 राजस्व गांव हैं जिनमें एक लाख 17 हजार पशु हैं। पशुपालन विभाग की टीम पशुओं का टीकाकरण करने में जुटी हुई है। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डा. वीके सिंह ने बताया कि बाढ़ क्षेत्र में 50 हजार पशुओं का टीकारण किया जा चुका है।
अभी 10 अगस्त तक पशुओं में टीकाकरण किया जाएगा। अब तक सोनौरा, अराजी अजगरा, मगर्वी, मसर्की, नैनीजोर, हैदराबाद, रोशनगंज, इस्माईलपुर आदि गांवों में टीकारण का कार्य पूरा हो चुका है। उन्होंने पशुपालकों से अपने पशुओं को चारा धोकर खिलाने की अपील की। क्षेत्र के चक्की गांव स्थित प्राइमरी विद्यालय में पानी भर गया है जिसके कारण विद्यालय को बंद कर दिया गया है।
चक्की गांव के प्रधान पल्टन यादव ने कहा कि गांव की आबादी 1300 से ऊपर है लेकिन प्रशासन ने सिर्फ दो नाव उपलब्ध कराई है जबकि यहां पर कम से कम पांच नाव होनी चाहिए। शाहडीह के प्रधन धर्मेंद्र यादव ने कहा कि एक नाव मिली है जो गांव की आबादी और स्थिति को देखते हुए कम हैं।
वहीं बाढ़ खंड के सहायक अभियंता आईसी तिवारी का कहना है कि जलस्तर तो बढ़ा है लेकिन बाढ़ नियंत्रण में है। शारदा बैराज से ढाई लाख क्यूसेक पानी नदी में छोड़ा गया है।