आजमगढ़। शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई) के तहत मुफ्त शिक्षा का लाभ लेने के लिए फर्जी आय प्रमाणपत्र लगाने वालों पर अब सख्त कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि ऐसे मामलों में अब केवल आवेदन निरस्त नहीं होगा, बल्कि संबंधित अभिभावक के खिलाफ प्राथमिकी भी दर्ज कराई जाएगी। बीएसए राजीव पाठक ने बताया कि प्रमाणपत्र फर्जी मिलने पर न सिर्फ अभिभावक के खिलाफ ही नहीं बल्कि प्रमाण पत्र जारी करने में शामिल जन सेवा केंद्र संचालक पर भी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इसलिए अभिभावक सही प्रमाण पत्र ही लगाएं।
प्रशासन को लगातार फर्जी आय प्रमाणपत्र के मामलों की शिकायतें मिल रही थीं। अब तक यदि कोई प्रमाणपत्र फर्जी पाया जाता था तो संबंधित छात्र का आवेदन रद्द कर दिया जाता था, लेकिन किसी प्रकार की कानूनी कार्रवाई नहीं होती थी। इससे गलत तरीके से लाभ लेने वालों के हौसले बढ़ते जा रहे थे। इसी को देखते हुए जिला स्तर पर आदेश जारी किए गए हैं कि आरटीई के तहत लगाए गए आय प्रमाणपत्रों की रैंडम जांच कराई जाएगी। जांच के दौरान प्रमाण पत्र नंबरों का तहसील रिकॉर्ड से मिलान किया जाएगा। जहां भी गड़बड़ी पाई जाएगी, वहां प्राथमिकी दर्ज कराई जाएगी।
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ऐसे बनवाएं आय प्रमाणपत्र
केवल सरकारी पोर्टल से जुड़े जन सेवा केंद्र से ही आवेदन करें और रसीद जरूर लें।
तहसील कार्यालय में सीधे लेखपाल, कानूनगो या संबंधित अधिकारी से आवेदन करें।
यूपी ई-डिस्ट्रिक्ट पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन करें, जहां प्रमाण पत्र डिजिटल रूप से जारी होता है।
प्रमाण पत्र पर क्यूआर कोड और यूनिक नंबर अवश्य जांचें।
यूपी ई-डिस्ट्रिक्ट पोर्टल पर जाकर स्वयं सत्यापन करें।
बिना रसीद या रिकॉर्ड वाले प्रमाण पत्र स्वीकार न करें।
किसी एजेंट या बिचौलिए के झांसे में न आएं।