आजमगढ़। मेरे पति अब इस दुनिया में नहीं रहे, उनकी गैरमौजूदगी में एक बेटा और पांच बेटियों की परवरिश मैं किस तरह से कर रही हूं, इसका दुख मैं ही समझ सकती हूं। मैंने ब्लड मनी के रूप में 20 लाख रुपये लेकर पति के हत्यारों को माफ कर दिया।
क्योंकि मेरा सुहाग तो गया, पर मैं दूसरी बहन की मांग क्यों सूनी होने दें। प्रमिला के माफीनामे के बाद यूएई के शारजाह जेल में फांसी की सजा पा चुके पांच भारतीयों को वहां की सरकार ने ना केवल माफ कर दिया बल्कि उन्हें जल्द भारत भेजने की तैयारी कर रही है।
शहर कोतवाली क्षेत्र के शेखपुरा गांव निवासी वीरेंद्र चौहान तीन भाईयों में बड़ा था। परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने के लिए वीरेंद्र चौहान वर्ष 2008 में यूएई के शारजाह में राजगीरी का काम करने लगा था। चार नवंबर 2011 को हंसी मजाक के दौरान वीरेंद्र की मनबढ़ों ने पीट-पीटकर हत्या कर दिया।
इस मामले में बिहार का धर्मेंद्र, पंजाब का रविंदर सिंह, रणजीत सिंह, दलबिंदर सिंह और सुच्चा सिंह को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। आरोपियों को फांसी की सजा सुनाकर उन्हें जेल में बंद करवा दिा। इधर वीरेंद्र की मौत के बाद पत्नी प्रमिला पर घर का जिम्मा आ गया।
धनाभाव में बच्चों की पढ़ाई रुक गई। बेटा एक दूकान पर मजदूरी करने लगा। इस दौरान प्रमिला ने जिले के सभी छोटे-बड़े नेताओं का दरवाजा खटखटाया लेकिन सभी ने सलाह देकर पल्ला झाड़ लिया। इसी बीच तीन दिन पहले प्रमिला के घर पंजाब के एक सामाजिक कार्यकर्ता पहुंचे और प्रमिला से सुलह-समझौते की पेशकश करते हुए ब्लड मनी के तौर पर 20 लाख रुपये देने की बात कही।
अपने सगे संबंधियों से राय मशविरा के बाद प्रमिला ने हामी भर दी । प्रमिला का कहना है कि इन रुपयों से वह बेटियों की शादी अच्छे से कर सकती है। जो होना था वह हो गया। अब किसी की जान लेने से उसके पति जिंदा नहीं हो जाएंगे।