रमजान माह में जनपद का गडेरूआ गांव गंगा-जमुनी तहजीब के रंग को और चटक करता है। इस गांव में 1975 से एक हिंदू परिवार राजेदारों को भोर में सहरी के लिए जगाता आ रहा है। पिता के बाद अब पुत्र इस परंपरा का निर्वहन कर रहा है।
गड़ेरूआ गांव निवासी चिरकिट यादव ने 1975 में इस परंपरा की शुरूआत किया था। पत्नी दुलारी देवी की प्रेरणा से वे गांव में रहने वाले मुस्लिम समुदाय के लोगों को सहरी के लिए जगाते थे। चिरकिट यादव के निधन के बाद गांव की इस परंपरा का निर्वहन उनके पुत्र विक्रम यादव व गुलाब यादव कर रहे हैं। पहले विक्रम यादव पिता के परंपरा को निभाना शुरू किया, जब उनकी आंखों की रोशनी कम होने लगी तो दूसरे भाई गुलाब यादव ने परंपरा को कायम रखने की जिम्मेदारी उठा ली। सहरी के पूर्व ही गुलाब यादव गांव के मुस्लिम परिवारों के दरवाजे पर पहुंचते हैं और आवाज लगा कर कहते है कि उठ जाओ सहरी का समय हो गया है।