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Azamgarh News: पांच साल पहले आए थे पैतृक गांव हरिहरपुर, संगीत घराने ने जताया शोक

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आजमगढ़। पद्म विभूषण पंडित छन्नूलाल मिश्र के निधन की सूचना मिलते ही जनपद के हरिहरपुर संगीत घराने में शोक है। हरिहरपुर पंडित छन्नू लाल मिश्रा का पैतृक गांव भी है। वह आखिरी बार पांच साल पहले गांव आए थे। इसके बाद तबीयत खराब हो गई थी।
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पद्म विभूषण (2020) से अलंकृत, विश्वविख्यात शास्त्रीय गायक, ठुमरी सम्राट और भक्तिरस के अद्भुत साधक पंडित छन्नूलाल मिश्र के निधन से उनके पैतृक गांव में तबले की थाप और हारमोनियम की आवाज थम सी गई है।
पंडित छन्नू लाल मिश्र जी हरिहरपुर घराने की शान और पहचान थे। यहां से निकलकर उन्होंने देश और विदेश में नाम कमाया। हरिहरपुर घराने की अपूर्णीय क्षति हुई है।- अजय मिश्र, गायक कलाकार, हरिहरपुर।
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भले ही हमारे बाबा वाराणसी में बस गए थे लेकिन गांव से उनका लगाव कम नहीं था। वह साल में एक बार जरूर गांव आते थे। इधर उम्र बढ़ने के साथ ही उनकी तबीयत भी खराब रहने लगी थी। पांच साल पहले गांव आए थे। - सुनील मिश्रा, पंडित छन्नू लाल मिश्र के पोते।
पंडित छन्नूलाल मिश्र के निधन से भारतीय शास्त्रीय संगीत जगत को बहुत बड़ा नुकसान हुआ है। उन्होंने ठुमरी, ख्याल, चैती और कजरी गायकी से दुनिया भर में पहचान दिलाई थी। - आदर्श मिश्रा, गायक कलाकार हरिहरपुर
- पंडित छन्नू लाल मिश्र जैसे संगीतकार कभी-कभार धरती पर जन्म लेते हैं। उन्होंने अपनी गायकी से जो मुकाम हासिल किया उसकी कल्पना हर कोई करता है। - भवानी प्रसाद मिश्र, पंडित छन्नूलाल मिश्र के भाई।
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