आजमगढ़-अंबेडकर जनपद की सीमा पर लगने वाले गोविंद साहब मेले का इंतजार हर किसी को रहता है। कहते हैं कि बाबा यहां आने वाले हर किसी की मुराद पूरी करते हैं। मेले में बाबा से मन्नतें मांगने के लिए श्रद्धालुओं का रेला उमड़ रहा है। वहीं इस दौरान लगने वाले मेले में जरूरत की हर चीज उपलब्ध है। मेला इस समय पूरे शबाब पर है। मेले में प्रतिदिन 20 से 25 घोड़ों के साथ ही एक से दो हाथियों की बिक्री हो रही है।
दो माह तक अनवरत चलने वाले मेले के दूसरे दिन भी श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। मेले में आए लाखों श्रद्धालुओं ने बाबा के सरोवर में डुबकी लगाई। मान्यता है कि मेले के दौरान पूरे दो माह तक किसी दिन भी कोई श्रद्धालु स्नान करेगा तो आज के जैसा ही उसे फल मिलेगा। स्नान के पश्चात श्रद्धालु बाबा की समाधि पर लाल गन्ना व कच्ची खिचड़ी चढ़ाते हैं। सरोवर में स्नान करने से सबके क्लेश मिट जाते हैं।
खिचड़ी का प्रसाद लेकर वहीं पर मिट्टी के बर्तन व उपले पर खिचड़ी पकाकर खाते हैं और मेले का आनंद उठाते हैं। लोग अपने शौक को पूरा करने के लिए घोड़े और हाथी की खरीददारी कर रहे हैं। घोड़ा विक्रेता सतीश यादव ने बताया कि मेले में प्रतिदिन 20 से 25 घोड़े और एक से दो हाथी प्रतिदिन बिक रहे हैं।
डेरी मालिक लालचंद्र वर्मा ने बताया कि मेले में अच्छी नस्ल की गाय भैंस बड़ी आसानी से उपलब्ध हो जाती है। क्योंकि जो शौकीन पशुपालक हैं, उन्हें इसी मेले का इंतजार होता है। पूरी निष्ठा व लगन के साथ अपने पशुओं को सजा संवार कर मेले में लाते हैं।
इससे उनके पशु बड़े ही आसानी बिक जाते हैं। पशु की खरीद व फरोख्त बड़े ही मुनाफे का व्यापार है। इस मेले से प्रतिदिन लगभग 50 भैंस व 100 गायों की बिक्री होती है। सुरेश पाल ने कहा कि बकरी पालन भी बड़े फायदे का व्यापार है।