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Azamgarh : गैंगस्टर कर रहा था थाने की नौकरी, 35 साल से नकदू से नंदलाल बन कर रहा था छलावा, जांच में हुआ खुलासा

Wed, 08 Jan 2025 01:24 PM IST
नितीश कुमार पांडेय अमर उजाला नेटवर्क, आजमगढ़

सार

गैंगस्टर शहर छोड़कर ऑटो ड्राइवर बन गया ऐसे किस्से तो अपने फिल्मों में बहुत देखे होंगे लेकिन एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। गैंगस्टर नकदू नंदलाल बनकर पुलिस विभाग में होमगार्ड के पद पर कार्य कर रहा था। 
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नकदू गैंगस्टर - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
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गैंगस्टर नकदू से नंदलाल बनकर 35 साल से होमगार्ड की नौकरी करने वाला अखिरकार निलंबित हो गया। जांच में फर्जीवाड़ा की पुष्टि होने पर पुलिस ने रानी की सराय थाने में उसके खिलाफ मुकदमा भी पंजीकृत किया है। उक्त मामले की जांच आरोपी नकदू के भतीजे की शिकायत पर तत्कालीन डीआईजी वैभव कृष्ण ने जांच कराई थी। आरोपी नकदू के खिलाफ हत्या, हत्या के प्रयास, डकैती के कई मामले दर्ज थे। सितंबर 1989 से लेकर 2024 तक जिले के रानी की सराय और मेंहनगर थाने में नौकरी करता रहा लेकिन किसी को इसकी भनक तक नहीं लगी थी।

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जानकारी मुताबिक आरोपी नकदू के भतीजे नंदलाल ने चाचा नकदू के खिलाफ तीन दिसंबर को डीआईजी वैभव कृष्ण से शिकायत की थी। आरोप लगाया था कि चाचा 35 साल से फर्जी तरीके से होमगार्ड की नौकरी कर रहे हैं। इस पर डीआईजी ने जांच के आदेश दिए। जांच में सामने आया कि रानी की सराय थाना क्षेत्र के चकवारा निवासी नकदू पर 1984 में हत्या और साक्ष्य छुपाने का मुकदमा दर्ज हुआ था। नकदू ने 1984 में जहानागंज थाना क्षेत्र के रहने वाले मुन्ना यादव की रंजिश में गोली मारकर हत्या कर दी थी। इसके बाद नकदू पर 1987 में डकैती का मुकदमा दर्ज हुआ।

फिर बाद में नकदू पर 1988 में गैंगस्टर की कार्रवाई की गई। इसकी हिस्ट्रीशीट भी खोली गई। जांच में सामने आया कि नकदू यादव कक्षा चार तक गांव के प्राइमरी स्कूल में पढ़ा है। कक्षा आठ का फर्जी प्रमाण पत्र बनवाकर वर्ष 1989 में होमगार्ड की नौकरी हासिल की। 
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1990 में आरोपी नकदू से बना नंदलाल : आरोपी नकदू ने नौकरी पाने के लिए अपनी पहचान भी बदल दी। 1990 के पहले तक आरोपी की पहचान नकदू यादव पुत्र लोकई यादव के रूप में थी। इसके बाद वह 1990 में आरोपी नकदू से नंदलाल बन गया। 

1988 में गैंगस्टर बनने के बाद 1989 में बना होमगार्ड : आरोपी नंदलाल यादव पर 1988 में गैंगस्टर की कार्रवाई कर हिस्ट्रीशीटर में शामिल कर लिया गया था। इसके बाद भी आरोपी ने सितंबर 1989 को होमगार्ड विभाग ज्वाइन कर लिया। मजे की बात तो ये है कि हिस्ट्रीशीटर होने के बाद भी तत्कालीन रानी की सराय थाने और लोकल इंटेलिजेंस की टीम के प्रभारियों ने आरोपी होमगार्ड के चरित्र प्रमाण पत्र पर सितंबर 1992 में हस्ताक्षर भी कर दिए हैं।

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