सदर तहसील के मतौलीपुर में तमसा तट पर बना गांधी उपवन कुछ इस तरह उजड़ गया।
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आजमगढ़। जिले में पंचवटी की अनुभूति कराने के लिए शासन के निर्देश पर सदर तहसील के मतौलीपुर गांव के पास तमसा के तट पर गांधी उपवन बनाया गया है। इसी में पंचवटी बनाने की योजना थी। भारत छोड़ो आंदोलन की 77वीं वर्षगांठ पर गांधी उपवन में गणमान्य व्यक्तियों व जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति में हजारों पौधे लगाए गए, जिसमें राष्ट्रपिता की अभिरुचि वाले 150 पौधे शामिल थे। पांच हेक्टेयर में बनए इस उपवन में महज एक ही पौधा नजर आ रहा है।
शहर के समीप मतौलीपुर गांव में नौ अगस्त 2019 को भारत छोड़ो आंदोलन की 77वीं वर्षगांठ पर पौधरोपण महाकुंभ का आयोजन किया गया था। इसके अंतर्गत गांधी उपवन में गांधीजी की अभिरुचि के पौधे आम, बरगद, नीम, बबूल, शाल, महुआ, कल्पवृक्ष व सहजन प्रजाति के पौधे लगाए गए थे। इस पर लाखों रुपये भी खर्च किए गए थे। चारों तरफ से तारबंदी की गई थी लेकिन रखरखाव के अभाव में तार भी कई जगह टूट गए हैं। विभागीय लापरवाही के चलते इसका रखरखाव नहीं हो सका। जबकि इसके रखरखाव के लिए यहां दो लोग लगाए गए थे। बावजूद मात्र एक पौधा यहां सुरक्षित रहा। बाकी सभी पौधे गायब हो गए। इतना ही नहीं विभाग द्वारा लगाए गए बोर्ड भी गायब हो गए। विभाग द्वारा यहां पर दोबारा पौधा भी नहीं लगाया गया। आज तक विभाग ने इस तरफ झांकने की जहमत तक नहीं उठाई।
बाढ़ प्रभावित इलाके में गांधी उपवन बनाना भूल
आजमगढ़। गांधी उपवन उजड़ जाने के बाद सभी एक-दूसरे पर जिम्मेदारी थोप रहे हैं। विभागीय अधिकारी का कहना है कि बाढ़ की वजह से सभी पौधे नष्ट हो गए। लेकिन जानबूझकर बाढ़ ग्रसित इलाके में गांधी उपवन बनाया गया तो यह किसकी जिम्मेदारी है। जबकि विभाग जानता है कि जिस स्थान पर गांधी उपवन बनाया गया है वहां तक तमसा का पानी हर साल भर जाता है। बावजूद इसके यहीं स्थापित किया गया।
डीएफओ ने ग्राम पंचायत पर फोड़ा लापरवाही का ठीकरा
आजमगढ़। सदर तहसील के मतौलीपुर गांव में वन विभाग द्वारा गांधी उपवन बनाया गया था। वन विभाग में लगाए गए सभी पौधे नष्ट हो गए। बावजूद विभाग द्वारा इसमें पौधे नहीं लगाए गए। वहीं डीएफओ गंगादत्त मिश्रा ने कहा कि विभाग ने गांधी उपवन की स्थापना कर उसमें पौधे लगाए थे। इसकी देखरेख की जिम्मेदारी ग्राम पंचायत की है। इसकी सुरक्षा उन्हीं को करनी थी।