जिले में हाल ही में हुई लगातार बारिश का सीधा असर अब आम जनता की जेब पर पड़ रहा है। बारिश के कारण बाहरी राज्यों और थोक मंडियों से फलों की आवक में भारी कमी आई है, जिसके परिणामस्वरूप शहर के फल बाजारों में कीमतों में जबरदस्त इजाफा हुआ है। पिछले दो महीनों की तुलना में रोजाना इस्तेमाल होने वाले फलों की कीमतें आसमान छू रही हैं।
बाजार में सबसे अधिक प्रभाव केले और सेब की कीमतों पर देखा जा रहा है। कुछ दिन पहले तक जो केला 40 रुपये प्रति दर्जन बिक रहा था, वह अब 60 रुपये प्रति दर्जन के पार पहुंच गया है।
इसी तरह, सेब की कीमतों में भी भारी वृद्धि हुई है। दो महीने पहले 150 रुपये प्रति किलो मिलने वाला सेब अब 220 रुपये प्रति किलो तक बिक रहा है, जो 70 रुपये प्रति किलो की वृद्धि है।
आम लोगों की पसंदीदा पपीता, जो पहले 40 रुपये प्रति किलो था, अब बढ़कर 60 रुपये प्रति किलो हो गया है। अच्छी गुणवत्ता वाले अनार भी अब 100 रुपये प्रति किलो के भाव से मिल रहे हैं।
फल व्यापारी सुरेंद्र सोनकर और नन्हे सोनकर ने बताया कि बारिश के कारण फलों की आपूर्ति श्रृंखला (सप्लाई चेन) बुरी तरह प्रभावित हुई है। मंडियों में माल की आवक कम हो गई है और परिवहन भाड़ा भी बढ़ गया है।
व्यापारी खुद मंडी से महंगे दामों में माल खरीद रहे हैं, जिसके कारण उन्हें यहां कीमतें बढ़ानी पड़ रही हैं। जब तक आपूर्ति सामान्य नहीं होती, तब तक कीमतों में राहत मिलने की उम्मीद कम है।
फल विक्रेता सीताराम सोनकर ने बताया कि फलों की बढ़ती कीमतों का सीधा असर बिक्री पर भी पड़ा है। फल के दाम बढ़ने की वजह से दुकानदारी पर बहुत असर पड़ा है। जो ग्राहक पहले 2-3 किलो फल खरीदते थे, वे अब आधा किलो या एक किलो से ही काम चला रहे हैं। सेब और केले जैसी मांग वाली वस्तुओं की कीमतें अधिक होने से बिक्री में 40 से 50 प्रतिशत तक की गिरावट आई है।