आरक्षण चार्ट में भी पीएनआर नंबर व बर्थ नंबर सब सही था लेकिन टिकट बनाने वाले ने एक गलती कर दी थी। टिकट भले छतीसगढ़ में बना लेकिन उस पर टिकट आरक्षित करने वाले स्टेशन का नाम एसआईपी (सुरेमनपुर) दिखाया गया। टिकट देखकर वह चौंक गए क्योंकि टिकट जिस कागज पर प्रिंट किया गया था वह एनआर (नार्दन रेलवे) का है। जबकि सुरेमनपुर में बने किसी भी टिकट के कागज पर एनईआर (नार्दन ईस्टर्न रेलवे) लिखा होना चाहिए। आखिर 24 घंटे में छत्तीसगढ़ से बना टिकट आजमगढ़ कैसे पहुंच गया। इसके पीछे कौन-कौन शामिल है इसकी जांच शुरू हो गई है।
संदिग्ध है रेल कर्मियों की भूमिका
रेलवे के पीआरएस काउंटर से जिस कागज पर टिकट प्रिंट किया जाता है, वह कागज रेलवे के अपने प्रेस में तैयार किया जाता है। बाकायदा रोल तैयार कर विभिन्न स्टेशनों को उनके नंबरों के आधार पर आवंटित किया जाता है। इस रोल की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण होती है।
इससे आसानी से पता चलता है कि किस नंबर तक का रोल किस स्टेशन को दिया गया है। अब सवाल यह उठता है कि रोल का कागज दलाल तक कैसे पहुंचा या कहीं इस टिकट का प्रिंट किसी स्टेशन के पीआरएस काउंटर से ही तो नहीं निकाला गया है।
तत्काल आरक्षित टिकट का बनना सुरेमनपुर स्टेशन पर दर्शाया गया है, लेकिन यह टिकट वास्तव में छत्तीसगढ़ में बना है। 24 घंटे में टिकट आजमगढ़ नहीं पहुंच सकता, साफ है कि टिकट की स्क्रीनिंग की गई है। यात्रा करने वाले व्यक्ति से पूछताछ की जा रही है। जांच के बाद ही कार्रवाई की जाएगी।
अशोक कुमार, जनसंपर्क अधिकारी, एनईआर वाराणसी मंडल।