रजिस्ट्रार विशेश्वर प्रसाद की मानें तो बीएड की मान्यता के लिए पहले संबंधित महाविद्यालय को राज्य सरकार से एनओसी लेनी पड़ती है। एनओसी मिलने के बाद उसे एनसीईटी की वेबसाइट पर मान्यता के लिए आवेदन करना होता है। इन महाविद्यालयों द्वारा मान्यता के लिए आवेदन किया गया था जो एनसीईटी की वेबसाइट पर शो भी कर रहा था। जिसके कारण इन लोगों ने बढ़ी सीटों पर एडमिशन लेना शुरू कर दिया था।
एमएड की मान्यता भी संदेह के घेरे में
रजिस्ट्रार विशेश्वर प्रसाद ने बताया कि महाराजा सुहेलदेव राज्य विश्वविद्यालय से संबद्ध कई महाविद्यालयों में एमएड की कक्षाएं भी संचालित होती हैं। जिसमें काफी संख्या में विद्यार्थी शिक्षा ग्रहण करते हैं। इन महाविद्यालयों में संचालित एमएड की मान्यता भी संदेह के घेरे में हैं। ऐसे में इन जिन महाविद्यालयों में एमएड की कक्षाएं संचालित हो रही हैं उनके भी सत्यापन के लिए लिखा गया है।
बोले अधिकारी
विश्वविद्यालय से संबद्ध चार महाविद्यालयों में संचालित बीएड की मान्यता को एनसीईटी ने फर्जी करार दिया है। जिसके कारण इनकी मान्यता को रद्द करते हुए इन पर तीन-तीन लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है। साथ ही इन महाविद्यालयों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों का दूसरे महाविद्यालयों में समायोजन कराया गया है। - प्रो. प्रदीप कुमार शर्मा, कुलपति महाराजा सुहेलदेव राज्य विश्वविद्यालय।