जीत के बाद भाजपा प्रत्याशी दिनेश लाल यादव निरहुआ
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आजमगढ़ उप चुनाव के नतीजों ने जनपद में समाजवाद के किले को भेद दिया है। अब इस गढ़ पर भाजपा ने अपना झंडा फहरा दिया है। लेकिन लगभग दो माह पूर्व जिस आजमगढ़ ने सपा को 10 विधायक दिए थे, उनमें से पांच विधायक मिलकर भी एक लोकसभा सीट को नहीं जीता सके। सबसे बड़ी बात यह रही कि आजमगढ़ सदर सीट से सपा प्रत्याशी को सबसे तगड़ा झटका लगा है। यहां निरहुआ ने सपा उम्मीदवार धर्मेंद्र यादव के मुकाबले लगभग 10 से 12 हजार अधिक मत हासिल किया है।
आजमगढ़ हमेशा से सपा का गढ़ रहा है। इस बात को मार्च 2022 में हुए विधानसभा चुनाव ने साबित कर दिया था। चाहे कोई भी लहर रही हो आजमगढ़ ने समाजवादियों का साथ दिया। इस बार के विधानसभा चुनाव में भी आजमगढ़ की जनता ने जनपद की सभी सीटों को सपा की झोली में डाला।
अखिलेश यादव के इस्तीफे के बाद जब चुनाव की घोषणा हुई तो सपा के लोग अपने एमवाई फैक्टर को लेकर अपनी जीत के प्रति काफी आश्वस्त नजर आए। उन्हें गुड्डू जमाली के मैदान में उतरने के बाद भी इस पर कोई फर्क पड़ता नजर नहीं आया। लोकसभा का यह उपचुनाव पांच विधानसभाओं सगड़ी, गोपालपुर, मेंहनगर, आजमगढ़ और मुबारकपुर विधानसभा में हुआ। इस सभी विधानसभा सीटों पर दो माह पूर्व ही सपा के नेता चुनाव जीतकर विधायक बने थे।
लेकिन सबसे बड़ी बात यह रही कि दो महीने बाद हुए उपचुनाव में यह पांच विधायक मिलकर एक लोकसभा का चुनाव नहीं जीता सके। सबसे बड़ी बात यह है कि जिस सीट से विधायक दुर्गा प्रसाद यादव 9 बार से विधायक हैं उस विधानसभा क्षेत्र में भाजपा 10 से 12 हजार मतों से आगे हो गई। इतना ही नहीं, पार्टी को सगड़ी और मेंहनगर में भी कम वोट मिले।
गोपालपुर विधानसभा क्षेत्र में समाजवादी पार्टी को भाजपा से लीड मिली। जबकि मुबारकपुर विधानसभा बसपा प्रत्याशी शाह आलम गुड्डू जमाली का संसदीय क्षेत्र था। हालांकि विधानसभा चुनाव में यहां सपा को जीत मिली थी, लेकिन लोकसभा उपचुनाव में शाह आलम गुड्डू जमाली सभी प्रत्याशियों पर भारी रहे।