अतरौलिया विकास खंड के गनपतपुर और मिर्जापुर विकास खंड के खुटौली ग्राम पंचायत में शिकायत के आधार पर हुई जांच में तीन लाख 65 हजार 177 रुपये वित्तीय अनियमितता पाई गई है। जांच रिपोर्ट के आधार पर जिलाधिकारी ने दोनों गांवों के ग्राम प्रधानों के वित्तीय अधिकार को सीज कर दिया है।
जिलाधिकारी ने बताया कि गनपतपुर में मनरेगा योजना के तहत 47828.00 रुपये की वित्तीय अनियमितता में प्रधान, सचिव और तकनीकी सहायक दोषी हैं। पंचायत राज एक्ट की धारा 95 (1) छह में प्रदत्त अधिकारों का प्रयोग करते हुए पूनम विश्वकर्मा ग्राम प्रधान गनपतपुर के समस्त वित्तीय/प्रशासनिक अधिकारों और कृत्यों के संपादन पर रोक लगा दी गई है। ग्राम पंचायत पद के दायित्वों के निर्वहन के लिए तीन सदस्यीय समिति का गठन भी किया है।
जिसमें श्रृंगारी पत्नी जगरनाथ, कृष्णावती पत्नी जमुना प्रसाद और प्रवेश पुत्र योगेंद्र सिंह के नाम शामिल हैं। इस प्रकरण में सहायक आयुक्त, सहायक निबंधक सहकारिता और सहायक अभियंता जिला ग्राम्य विकास अभिकरण को अंतिम जांच अधिकारी नामित करते हुए निर्देशित किया गया है कि उपरोक्त प्रकरण की जांच एक पक्ष के अंदर करते हुए जांच आख्या जिला पंचायत राज अधिकारी को उपलब्ध कराएं।
वहीं मिर्जापुर विकास खंड के खुटौली ग्राम पंचायत की शिकायत में प्रधान, सचिव और तकनीकी सहायक छोटेलाल द्वारा जांच में कुल कार्यो में 317349.00 रुपये की वित्तीय अनियमितता पाई गई। इसके लिए ग्राम प्रधान खुटौली परमशीला के समस्त वित्तीय/प्रशासनिक अधिकारों और कृत्यों के संपादन पर रोक लगा दी गई है। ग्राम पंचायत पद के दायित्वों के निर्वहन के लिए सदस्यीय टीम का गठन किया गया है।
जिसमें संदीप सिंह, धर्मू और फिरता के नाम शामिल है। इस प्रकरण में परियोजना निदेशक और सहायक अभियंता जिला ग्राम्य विकास अभिकरण को अंतिम जांच अधिकारी नामित करते हुए एक पक्ष के अंदर जांच आख्या जिला पंचायत राज अधिकारी को उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया है।